पारिया को दुरुस्त रखने के लिए अपनाएं ये योगासन
शरीर की तंदुरुस्ती आपके पाचन तंत्र पर निर्भर करती है। पाचन तंत्र की मदद से भोजन आपके शरीर की आवश्यकता को पूरा करता है। इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है और कोशिकाएं ठीक होती हैं। आइए आपको बताते हैं कि पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए कौन कौन से योग करने चाहिए।
आपको जो भी व्यक्ति सेहतमंद दिखता है, समझ जाएं कि उसका पाचन तंत्र दुरुस्त है। अगर आपका पाचन तंत्र ठीक नहीं है या आपका वजन बहुत कम है, तो आपको सही व्यायाम करने की जरूरत है, ताकि आपकी पाचन क्रिया दुरुस्त बनी रहे। दरअसल, बिना अच्छे पाचन तंत्र के किसी व्यक्ति का स्वस्थ रहना मुश्किल है। आज की इस तेज रफ्तार जिंदगी में कई ऐसे लोग देखने को मिल जाते हैं, जिनका शरीर बहुत कमजोर होता है। ऐसा नजर आता है, जैसे वे खाना बहुत कम खाते हैं, जबकि वास्तव में वे सबसे अधिक खाना खाते हैं। यह अलग बात है कि खाया हुआ खाना उनके शरीर में नहीं लगता। इसका कारण है पाचन तंत्र का ठीक न होना। आइए जानते हैं कि किन योगासनों को अपने जीवन में अपनाकर आप इस समस्या से निजात पा सकते हैं।
1.वज्रासन :
खाना खाने के बाद वज्रासन करना पेट और गर्भाशय की मांसपेशियों को शक्ति प्रदान करता है। नियमित तौर पर वज्रासन का अभ्यास जोड़ों के दर्द जैसे रोगों को दूर रखने में मददगार होता है। वजन को कम और शरीर को सुडौल बनाने में यह आसन मदद करता है। वज्रासन के दौरान शरीर के मध्य भाग पर सबसे अधिक दबाव पड़ता है। इस दौरान पेट और आंतों पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे कब्ज की दिक्कत दूर होती है और पाचन ठीक रहता है।
विधि : इस आसन के लिए आप दोनों घुटनों को मोड़ लें और पंजों के बल नीचे बैठ जाएं। शरीर का पूरा भार आप पैरों पर डालें। वज्रासन करते समय कमर एकदम सीधी रखें। अब इसी अवस्था में 10 मिनट बैठे रहें और लम्बी-लम्बी सांस लें।
2.नौकासन
इस आसन को नौकासन इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसमें मुद्रा नाव की तरह होती है। यह पेट की चर्बी को कम करने के लिए बहुत ही प्रभावशाली योगाभ्यास है। यह पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है, साथ ही साथ सिर से लेकर पैर की अंगुली तक फायदा पहुंचाता है।
विधि : सबसे पहले आप पीठ के बल लेट जाएं। आपके हाथ जांघ के बगल में हों और आपका शरीर एक सीध में हो। अब आप सांस लेते हुए अपने सिर, पैर को 30 डिग्री पर उठाएं। धीरे-धीरे सांस लें और धीरे-धीरे सांस छोड़ें, इसको अपने हिसाब से बनाए रखें।
3.धनुरासन :
इस आसन में शरीर की आकृति खिंचे हुए धनुष के समान दिखाई देती है, इसलिए इसे धनुरासन कहा जाता है। इससे सभी आंतरिक अंगों, मांसपेशियों और जोड़ों का व्यायाम हो जाता है। गले के तमाम रोग नष्ट होते हैं। पाचन शक्ति बढ़ती है, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, कमर दर्द और पेट संबंधी रोगों में भी यह लाभकारी है।
विधि : सबसे पहले आप पेट के बल लेट जाएं। सांस छोड़ते हुए घुटनों को मोड़ें और अपने हाथ से टखनों को पकड़ें। सांस लेते हुए आप अपने सिर, छाती एवं जांघ को ऊपर की ओर उठाएं। अपने शरीर के लचीलेपन के हिसाब से आप अपने शरीर को और ऊपर उठा सकते हैं। इसी तरह पेट संबंधी विकार दूर करने के लिए अग्निसार क्रिया का भी लाभ लिया जा सकता है।
4.कपालभाति :
कपालभाति प्राणायाम के अभ्यास से तनाव, अस्थमा की बीमारी दूर हो जाती हैं। इससे गैस, कब्ज और खून के विकार की समस्याएं दूर होती हैं।
विधि : पद्मासन, सिद्धासन, सुखासन या कुर्सी पर रीढ़, गला व सिर को सीधा कर बैठ जाएं। हाथों को घुटनों पर स्थिरतापूर्वक रख लें। आंखों को ढीला बंद कर तीन-चार श्वास-प्रश्वास लें। अब नासिका द्वारा सामान्य श्वास अंदर लेकर नासिका द्वारा ही एक हल्के झटके से श्वास बाहर निकालें। पुन: सामान्य श्वास अंदर लेकर झटके से प्रश्वास बाहर निकालें। यह कपालभाति क्रिया है। इसमें आवृत्तियों चक्रों की संख्या बढ़ाएं।
योग से पाचन शक्ति का प्राकृतिक उद्दीपन (How to improve digestive system naturally)
दुरस्त पाचन तंत्र, उत्तम स्वास्थय प्राप्ति का एक महत्व पूर्ण स्तम्भ है। अगर व्यक्ति का पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम करे तो वह पेट दर्द, कब्ज, पेट के घाव व वायु-विकार आदि अनेक व्याधियों से बच सकता है।
अधिक मात्रा में तथा असमय भोजन करने, प्रकृति विरुद्ध पदार्थों के सेवन व तनाव आदि के फलस्वरूप पाचन तंत्र बिगड़ जाता है। इसे दुरस्त करने के लिए हम एक दो समय का उपवास करते है या कुछ एंटासिड (अम्ल-रोधी) गोलियां खा लेते है। इन सबसे से लाभ तो होता है पर यह अस्थायी होता है।
पाचन शक्ति बढ़ाने के 6 उपाय :
• भोजन से आधा घंटे पूर्व व पश्चात् पानी न पिए
• रात में गरिष्ठ भोजन का सेवन न करें
• भोजन के तुरंत बाद लेटें नहीं
• नियमित योगाभ्यास करें
• फ़ास्ट फ़ूड या जंक फ़ूड से बचें
• अधिक रेशे वाले पदार्थों का सेवन करें
पाचन शक्ति बढ़ाने के योग :
हालाँकि,अपने दैनिक जीवन-चर्या में समूल परिवर्तन करना बड़ा कठिन है फिर भी अपने पाचन तंत्र को सशक्त बनाने व पुनर्जीवन प्रदान करने के लिए कुछ प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। शरीर को अपनी पूर्व स्वस्थ अवस्था में लौटाने में योग से अधिक कारगर कोई और उपाय हो नहीं सकता। यह किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव से रहित एक प्रामाणिक तकनीक है। जो जीवन चर्या में बिना कोई विशेष परिवर्तन के, शरीर को प्राकृतिक व सम्पूर्ण रूप से स्वस्थ करने में सक्षम है।
निम्नलिखित योगासनों का अभ्यास उदर सम्बन्धी अंगो को शिथिलता प्रदान कर, उनको तनाव मुक्त कर, पाचनतंत्र को स्वस्थ सुचारू व सक्रिय बनाता है:
• उस्ट्रासन |Camel pose
• पद्मासन | Lotus pose
• धनुरासन | Dhanurasana
• नौकासन |Naukasana
• सेतुबंधासन |SetuBandhasan
• पवन मुक्तासन | Pavanamuktasana
1. उस्ट्रासन
उस्ट्रासन शरीर के अग्र-भाग में खिंचाव उत्पन्न करता है जिससे उदार के सभी अंग सक्रिय हो जाते है। यह आसन शारीरिक मुद्रा (उठते बैठते समय शरीर की स्थिति) को संतुलित करता है, तथा महिलाओं को मासिक स्त्राव में होने वाले कष्ट से मुक्ति प्रदान करता है।
2. पद्मासन
यह बैठ किया जाने वाला एक सरल आसन है जो पाचन क्रिया को उन्नत करता है। मांसपेशियों के तनाव को कम करता है और रक्तचाप को नियंत्रित करता है।
3. धनुरासन
धनुरासन उदर की मांसपेशियों में खिंचाव कर उन्हें बल प्रदान करता है। इससे शरीर कब्ज से मुक्त होता है और मासिक धर्म के कष्ट से भी छुटकारा मिलता है।
4. नौकासन
यह आसन भी पेट के समस्त अंगो को बल प्रदान करता है जिसके फलस्वरूप पाचन क्रिया में सुधार होता है। यह शरीर में इकट्ठे हुए तनाव को कम करता है तथा पीठ को सुदृढ़ करता है।
5. सेतुबंधासन
यह आसन पेट की मांसपेशियों को उत्प्रेरित करता है जिससे पाचन बेहतर होता है। इस के अभ्यास से व्यक्ति तनाव, निराशा व चिंता से मुक्त हो जाता है।
6. पवन मुक्तासन :
पवन मुक्तासन से उदर के अंगों की मालिश होती है और उन्हें बल प्राप्त होता है। यह शरीर में जमा होने वाली वायु के निस्सरण में सहायक है और पाचन क्रिया को उद्दीप्त करता है।
योग एक प्रभावी तकनीक है जो न केवल पाचन तंत्र के लिए उपयोगी है अपितु वह सम्पूर्ण शरीर को सुगठित गठन करता है। अगर आप किसी प्रकार का शारीरिक व्यायाम करते है तो उसमें आप योग आसनों का समावेश कर सकते हैं। किसी भी व्यायाम की तरह योग का असर नजर आने में भी समय लगता है। नियमित अभ्यास आपके पाचन तंत्र को सुदृढ़ कर आपके शारीरिक सौष्ठव को बढाता है तथा शरीर को लचीला पन प्रदान करता है।
अत: नित्य आधा घंटे का समय अपनी योग चटाई पर बिताइये, उपरोक्त योगासनों में स्वयं को स्थिर कर पेट अपने पाचनतंत्र को उसके उच्चतम स्तर पर पुनर्स्थापित कीजिये।
यद्यपि योगाभ्यास शरीर और मन के लिए बहुत फ़ायदेमंद है, फिर भी किसी विकार के लक्षण की स्थिति में डॉक्टर से सम्पर्क करें।
(साभार ‘आर्ट ऑफ लिविंग’)
