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	<title>Hindi &#8211; Dr Akash Mathur</title>
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	<title>Hindi &#8211; Dr Akash Mathur</title>
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		<title>हाई फाइबर फूड</title>
		<link>https://drakashmathur.com/15-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[drakashmathur]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jul 2024 07:45:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Media Articles]]></category>
		<category><![CDATA[पाचन : सामान्य जानकारियां]]></category>
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					<description><![CDATA[हाई फाइबर फूड (High-Fiber Food Items) फाइबर एक ऐसा मिनरल है जिसको हर किसी की डाइट में होना चाहिए। यह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हाई फाइबर फूड</strong><br />
(High-Fiber Food Items)</p>
<p>फाइबर एक ऐसा मिनरल है जिसको हर किसी की डाइट में होना चाहिए। यह मेटाबोलिज्म को बढ़ाता है जिससे वजन कम होने में मदद मिलती है। अगर आप वजन कम करने की सोच रहे हैं तो फाइबर फूड को अपनी डाइट में जरुर शामिल करें।</p>
<p>फाइबर एक माइक्रो आहार है जो सेहतमंद और बैलेंस डाइट के लिए महत्तवपूर्ण रुप निभाता है। फाइबर जल्दी से पचता नहीं है जिससे पेट स्वस्थ रहता है और डायजेस्टिव सिस्टम को भी सेहतमंद बनाए रखने में मदद करता है। फाइबर के कारण पाचन शक्ति धीरे काम करती है जिससे कई फायदे होते हैं। फाइबर से भरपूर डाइट शरीर में शुगर के अब्जॉर्बशन को धीरे कर देती है जिससे अग्न्याशय (pancreas) को इंसूलिन बनाने का काफी समय मिल जाता है। इसलिए डायबटीज से गुजर रहे लोगों को अपनी डाइट में फाइबर को बढ़ाने के लिए कहा जाता है। यहां से आप फाइबर से भरपूर फूड लिस्ट की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<p>• 15 हाई फाइबर फूड (15 High-Fiber Food Items)<br />
• 1. चिया बीज<br />
• 2. एवोकैडो<br />
• 3. राजमा<br />
• 4. चने<br />
• 5. बादाम<br />
• 6. ब्रोकली<br />
• 7. क्विनोआ<br />
• 8. काले सेम<br />
• 9. सोयाबीन<br />
• 10. आटिचोक<br />
• 11. कद्दू<br />
• 12. सेब<br />
• 13. केला<br />
• 14. संतरा<br />
• 15. कुट्टू का आटा</p>
<p><strong>हाई फाइबर फूड (15 High-Fiber Food Items)</strong></p>
<p><strong>1. चिया बीज</strong><br />
चिया बीज में डाइट्री फाइबर होता है जो डाइट कर रहे लोगों के लिए अच्छा ऑप्शन है। चिया बीज पाचन शक्ति को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। चिया बीज का सेवन करने से शरीर में अच्छा फैटी एसिड आता है और साथ ही कोलेस्टॉल लेवल भी सामान्य बना रहता है।<br />
<strong>2. एवोकैडो</strong><br />
एवोकैडो में 6.7% डायट्री फाइबर होता है। यह कार्बोहाइड्रेट के साथ- साथ सेहतमंद फैट से भरपूर होता है जो वजन को सामान्य और दिल को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसमें विटामिन के और पोटेशियम भी पाया जाता है जो फ्री रेडिकल से लड़ने के लिए बहुत ताकतवर एंटीऑक्सीडेंट हैं। यह शरीर में फ्री रेडिकल के द्वारा किए जाने वाले नुकसान को होने से रोकते हैं।<br />
<strong>3. राजमा</strong><br />
राजमा और बाकी फलियां डायट्री फाइबर से भरपूर होती हैं। इनमें प्रोटीन भी भारी मात्रा में पाया जाता है। 100 ग्राम राजमा से आपको 6 ग्राम फाइबर प्राप्त होता है। और पूरे दिन में 25 से 30 ग्राम फाइबर का सेवन करना चाहिए। इसके बाद हम कह सकते हैं कि राजमा एक अच्छा ऑप्शन है। राजमा एक अच्छा ऑप्शन इसलिए भी है क्योंकि इसमें हाई प्रोटीन होता है जिससे मांसपेशियों का विकास और फैट बर्न एक साथ हो जाता है।<br />
<strong>4. चने</strong><br />
चने में भी हाई फाइबर और हाई प्रोटीन होता है। राजमा के मुकाबले चने में ज्यादा फाइबर होता है। 100 ग्राम चने में 8 ग्राम फाइबर पाया जाता है। फलियां प्रोटीन, फाइबर, मिनरल्स और विटामिन से भरपूर होती है और इनको आप नज़रअंदाज नहीं कर सकते हैं।<br />
<strong>5. बादाम</strong><br />
ड्राए फ्रूट में बादाम में सबसे ज्यादा मात्रा में डायट्री फाइबर पाया जाता है। बादाम फाइबर के साथ- साथ कई सारे आहार और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है जैसे कि विटामिन ई, मैंगनीज और मैग्नीशियम जो हड्डियों को मजबूत करने में मदद करते हैं। कोलेस्टॉल को कंट्रोल करने के लिए और दिल की सेहत को सुधारने के लिए बादाम को डाइट में जरुर शामिल करना चाहिए।<br />
<strong>6. ब्रोकली</strong><br />
इस हरी सब्जी में सही मात्रा में डायट्री फाइबर होता है और साथ ही विटामिन ई भी होता है जो एक बहुत अच्छा एंटीऑक्सीडेंट है। ब्रोकली को हाई अकार्बनिक नाइट्रेट के लिए जाना जाता है जिससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है और कसरत अच्छे से करने में मदद करता है। 100 ग्राम ब्रोकली में 2.6 ग्राम डायट्री फाइबर पाया जाता है।<br />
<strong>7. क्विनोआ</strong><br />
क्विनोआ डायट्री फाइबर, मिनरल्स और विटामिन से भरपूर है। जो लोग ग्लूटेन की बीमारी से गुजर रहे हैं उन लोगों के लिए यह एक अच्छा ऑप्शन है। क्विनोआ में मौजूद फाइबर डायजेस्टिव सिस्टम को स्वस्थ बनाए रखता है और अच्छे से काम करने में मदद करता है। इसके अलावा यह मेटाबोल्जिम को भी अच्छा करता है और वजन कम करने में मदद करता है।<br />
<strong>8. काले सेम</strong><br />
काले सेम एक तरह की फलियां हैं जिनमें डायट्री फाइबर भारी मात्रा में पाया जाता है। यह फाइबर के साथ- साथ मिनरल्स जैसे कि आयरन और मैग्नीशियम से भी भरपूर हैं। मैग्नीशियम, कैल्शियम को तोड़ने का काम करता है जिससे हड्डियों में यह अच्छे से अब्जॉर्ब हो जाता है। और आयरन को हीमोग्लोबिन प्रोड्यूज करने के लिए जाना जाता है जिससे खून में ऑक्सीजन का बहाव बना रहता है और ऑक्सीजन की कमी भी नहीं होती है।<br />
<strong>9. सोयाबीन</strong><br />
सोयाबीन में प्रोटीन और सामान्य स्तर पर फाइबर पाया जाता है जिसको आप अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। सोयाबीन कई तरीके के आते हैं इनको बार अपनी पसंद के अनुसार कई तरीके से पका कर खा सकते हैं। सोयाबीन के कई प्रोडक्ट हैं जैसे कि सोया का आटा, टोफू, सोया दूध और सोयाबीन का तेल। इन सभी प्रोडक्ट को आप अलग- अलग तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं और अपने खाने का पोष्टिक आहार और फाइबर बढ़ा सकते हैं।</p>
<p><strong>सोयाबीन के कई प्रोडक्ट हैं जैसे कि सोया का आटा, टोफू, सोया दूध और सोयाबीन का तेल।</strong><br />
<strong>10. आटिचोक</strong><br />
आटिचोक में एंटीऑक्सीडेंट के साथ- साथ फाइबर भी पाया जाता है। एक मीडियम आटिचोक में 6.9 ग्राम डायट्री फाइबर होता है। इसको आप अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं जिसके बाद डायजेस्टिव सिस्टम से जुड़ी दिक्कतें आप से बहुत दूर रहेंगी।<br />
<strong>11. कद्दू</strong><br />
इस सब्जी में फाइबर के साथ- साथ विटामिन ए, विटामिन के और मिनरल्स भी होते हैं जैसे कि कैल्शियम। सामान्य रुप से कद्दू खाने से आपको पूरे दिन का 10.7% फाइबर होता है। इससे यह साफ ज़ाहिर होता है कि यह सब्जी आपके डायजेस्टिव सिस्टम को स्वस्थ रखने में अवश्य मदद करेगी। इसके साथ ही कैल्शियम और विटामिन से भरपूर होने के कारण यह एक अच्छा एंटीऑक्सीडेंट भी है जो हड्डियों को भी मजबूत रखने में मदद करता है।<br />
सामान्य रुप से कद्दू खाने से आपको पूरे दिन का 10.7% फाइबर होता है।<br />
<strong>12. सेब</strong><br />
एक सेब खाने से 16.1% पूरे दिन का फाइबर मिलता है जिससे आप बेशक डॉक्टर से दूर रहेंगे। सेब खाने से डायजेस्टिव सिस्टम स्वस्थ रहता है और वजन कम होने में भी मदद मिलती है। इसके अलावा सेब में विटामिन सी और विटामिन ए भी मौजूद होता है जिससे यह एक अच्छा एंटीऑक्सीडेंट है जो फ्री रेडिकल से होने वाले नुकसान से शरीर को बचाकर रखता है।<br />
<strong>13. केला</strong><br />
हाई फाइबर लिस्ट में केले को भी शामिल करना जरुरी है। एक मीडियम साइज के केले में 9.2% फाइबर होता है जो आपके पूरे दिन लिए काफी है। इसके अलावा केले में पोटैशियम भी होता है जिसके कई सारे फायदे हैं। पोटैशियम शरीर में ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी के आसार को कम करने में मदद करता है।<br />
एक मीडियम साइज के केला में 9.2% फाइबर होता है जो आपके पूरे दिन लिए काफी है।<br />
<strong>14. संतरा</strong><br />
जब आप कुछ सेहतमंद खाने को ढूंढ रहे हैं तो खट्टे फलों को बिल्कुल न भूलें। संतरे में विटामिन सी होता है जिसके कई सारे फायदे हैं। एक संतरा खाने से आपको पूरे दिन 10.1% फाइबर प्राप्त होता है।<br />
संतरे में विटामिन सी होता है जिसके कई सारे फायदे हैं।<br />
<strong>15. कुट्टू का आटा</strong><br />
क्विनोआ की तरह कुट्टू का आटा ग्लूटेन फ्री अनाज है जिसमें डायट्र फाइबर होता है जो सेहतमंद जिंदगी देता है। 100 ग्राम कुट्टू का आटा खाने से आपको पूरे दिन का 25% फाइबर प्राप्त होता है। यह मांसपेशियों के विकास के लिए भी जरुरी होता है।<br />
100 ग्राम कुट्टू का आटा खाने से आपको पूरे दिन का 25% फाइबर प्राप्त होता है।</p>
<p><strong>आखिर में</strong><br />
मेटाबोल्जिम और फैट को बर्न करने की बात है तो हाई फाइबर डाइट का होना जरुरी है। फाइबर का सेवन भी नियमित रुप से ही करना चाहिए। एक दिन में ज्यादा से ज्यादा 30 ग्राम फाइबर का सेवन करना चाहिए। फाइबर को पचने में ज्यादा समय लगता है इसलिए ज्यादा मात्रा में फाइबर खाने से वजन भी बढ़ सकता है। फाइबर को अपनी डाइट में शामिल करने से साथ- साथ कसरत को भी रोजाना करना शुरु कर दें।</p>
<p><strong>सामान्यतया पूछे जाने वाले सवाल और जवाब :</strong><br />
फाइबर से भरपूर फूड्स कौन से हैं? (What foods are highest in fiber?)</p>
<p>फाइबर से भरपूर कई फूड्स हैं जैसे कि संतरा, केला, कुट्टू का आटा, सेब, कद्दू, सोयाबीन, ब्रोकली, चने, राजमा, बादाम आदि।<br />
• किन फल और सब्जियों में फाइबर सबसे ज्यादा होता है? (Which fruits and vegetables have most fiber?)<br />
फल- संतरा, केला, सेब, स्ट्रॉबेरी। सब्जियां- हरी मटर, ब्रोकली, आलू, स्वीट कॉर्न, पत्ता गोभी आदि।<br />
• क्या अंडे फाइबर से भरपूर होते हैं? (Are eggs high in fiber?)<br />
अंडे फाइबर से भरपूर होते हैं जिससे पेट लंबे समय के लिए भरा रहता है। ब्रेकफास्ट में अंडा खाना एक अच्छा ऑप्शन है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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			</item>
		<item>
		<title>कब्ज: अगर आप नियमित शौच नहीं कर सकते तो क्या करें?</title>
		<link>https://drakashmathur.com/12-3/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[drakashmathur]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jul 2024 07:44:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Media Articles]]></category>
		<category><![CDATA[पाचन संबंधी रोग/विकार]]></category>
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					<description><![CDATA[कब्ज काफी आम है, यह लगभग 25% लोगों को प्रभावित करता है । ऐसे कई अलग-अलग कारक हैं जो किसी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कब्ज काफी आम है, यह लगभग 25% लोगों को प्रभावित करता है । ऐसे कई अलग-अलग कारक हैं जो किसी व्यक्ति के मल त्याग की प्रकृति को प्रभावित करते हैं, व्यायाम और खाने की आदतों, लिंग, आयु और समग्र स्वास्थ्य स्थिति आदि।</p>
<p>एक व्यक्ति को मल त्याग की एक निश्चित संख्या का होना आवश्यक नहीं है, क्योंकि एक व्यक्ति के लिए जो सामान्य है वह दूसरे के लिए असामान्य हो सकता है। अधिकांश लोगों की अपनी दिनचर्या होती है, और अपने नियमित पैटर्न से बहुत अधिक विचलित होना यह संकेत कर सकता है कि कुछ गलत है।</p>
<p>कब्ज न केवल कम और अनियमित मल त्याग का कारण बनता है, बल्कि मल कठोर हो सकता है और इसे निकालना कठिन भी हो सकता है। शौचालय में अत्यधिक तनाव और अधिक समय लगना स्वस्थ संकेत नहीं है और इससे कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि मलाशय से रक्तस्राव ।</p>
<p><strong>कब्ज के कारण :</strong><br />
कब्ज के भिन्न कारण होते हैं। एक गंभीर स्थिति के रूप में, यह डिहाइड्रेशन (dehyderation) जैसी सरल स्थिति या बहुत कम फाइबर वाले खाद्य पदार्थ खाने के कारण हो सकता है। अधिक गंभीर पुराने मामलों में, कब्ज तनाव, हार्मोनल परिवर्तन, रीढ़ की हड्डी में चोट, मांसपेशियों की समस्याओं, कैंसर या पाचन तंत्र को प्रभावित करने वाली अन्य संरचनात्मक समस्याओं का परिणाम हो सकता है।<br />
बड़ी आंत (colon) का मुख्य काम भोजन से पानी को अवशोषित करना है क्योंकि यह पाचन तंत्र से गुजर रहा है और मल (या अपशिष्ट) बना रहा है। बड़ी आंत की मांसपेशियां अंततः मलाशय के माध्यम से कचरे को बाहर निकालने के लिए प्रेरित (propel) करती हैं, लेकिन यदि मल बहुत लंबे समय तक बड़ी आंत में रहता है, तो यह कठोर और निकालने में कठिन हो सकता है ।</p>
<p><strong>उच्च फाइबर आहार :</strong><br />
कब्ज से पीड़ित लोगों के लिए सबसे आम सलाह में से एक है अधिक फाइबर खाना। आहार फाइबर (dietary fibre) पौधों में गैर-पचाने योग्य कार्बोहाइड्रेट को दिया गया नाम है। यह फल, सब्जियां, अनाज, नट और बीज सहित सभी पौधों के खाद्य पदार्थों में पाया जा सकता है। आम तौर पर यह सिफारिश की जाती है कि पुरुष प्रति दिन 38 ग्राम फाइबर और महिलाएं 25 ग्राम खाती खाएं।</p>
<p>भले ही हमारा शरीर वास्तव में फाइबर को पचा नहीं सकता है, लेकिन इसे पर्याप्त मात्रा में खाना आंत के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। &#8216;आहार फाइबर&#8217; मल की मात्रा को बढ़ाता है, और उसे नरम बनाता है! इस प्रकार के मल अधिक उपयुक्त होते हैं, क्योंकि वे आपकी आंतों से अधिक तेज़ी से आगे बढ़ते हैं और आसानी से निकल जाते हैं।</p>
<p><strong>घुलनशील फाइबर :</strong><br />
जई का चोकर (oat bran), मेवा (nuts) , बीज (seeds),बीन्स, दाल और मटर के साथ-साथ कुछ फलों और सब्जियों में घुलनशील फाइबर पाया जाता है। घुलनशील फाइबर पानी को अवशोषित करता है और एक जैल जैसा पदार्थ बनाता है, जो मल को आंतों से आसानी से गुजरने में मदद करता है और इसके स्वरूप और स्थिरता में सुधार करता है।</p>
<p><strong>अघुलनशील फाइबर :</strong><br />
अघुलनशील फाइबर जई का चोकर (oat bran), नट, बीज, सेम, दाल और मटर, साथ ही कुछ फलों और सब्जियों में पाया जाता है। यह फाइबर आपके मल की मात्रा बढ़ता (bulks up) है और ब्रश की तरह काम करता है तथा सब कुछ बाहर निकालकर आंतों को साफ करता है।</p>
<p>सामान्य तौर पर, पर्याप्त फाइबर खाने से मल त्याग नियमित रखने में मदद मिल सकती है। यह आंत में अच्छे बैक्टीरिया के संतुलन में भी सुधार कर सकता है। यह हृदय रोग, मोटापा और मधुमेह जैसी विभिन्न बीमारियों के जोखिम को कम कर सकता है।</p>
<p><strong>अधिक पानी पीना :</strong><br />
निर्जलीकरण (dehyderation) कब्ज के प्रमुख कारणों में से एक है। भोजन अपशिष्ट (food waste) को पाचन तंत्र से गुजरने के लिए, भरपूर पानी की आवश्यकता होती है। इसके बिना, मल कठोर, ढेलेदार और निकलने में मुश्किल वाला हो सकता है।<br />
कुछ जूस पीने से भी कुछ लोगों को कब्ज से राहत मिल सकती है। फलों और सब्जियों से बने कई रसों में आहार फाइबर और सोर्बिटोल (sorbitol) होते हैं, ये दोनों ही मल त्याग को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। जूस में बड़ी मात्रा में पानी भी होता है, जो शरीर को हाइड्रेट रखते हुए कठोर मल को नरम करने में मदद कर सकता है।<br />
काफी पीजिये :<br />
कुछ लोगों में कॉफी का लक्जेटिव (lexative) प्रभाव हो सकता है। कॉफी का प्रभाव केवल कैफीन के कारण नहीं होता है, क्योंकि डिकैफ़िनेटेड कॉफी ने वही या उससे भी अधिक प्रभाव दिखाया है। इसके अलावा, अधिकांश लोगों को अन्य कैफीनयुक्त पेय, जैसे सोडा या ऊर्जा पेय पीने के बाद शौच नहीं करना पड़ता है। किसी भी तरह से, कॉफी को अपनी दिनचर्या के हिस्से के रूप में शामिल करना निश्चित रूप से मल त्याग को प्रोत्साहित करने में मदद कर सकता है ।<br />
नियमित रूप से व्यायाम करें :<br />
नियमित और लगातार व्यायाम भोजन को बड़ी आंत से गुजरने में लगने वाले समय को कम करके कब्ज को दूर करने में मदद करता है, जिससे आपके शरीर को मल से अवशोषित होने वाले पानी की मात्रा सीमित हो जाती है।व्यायाम के परिणामस्वरूप पूरे पाचन तंत्र में रक्त के प्रवाह में वृद्धि होती है,जिससे मल त्याग की प्रक्रिया को सहायता मिलती है।</p>
<p><strong>कब्ज: अपने डॉक्टर से रेचक या लक्जेटिव (laxative) की कोशिश करने के बारे में पूछें !</strong><br />
लक्जेटिव कब्ज को दूर करने और रोकने में मदद कर सकते हैं, लेकिन सभी लक्जेटिव लंबे समय तक उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं हैं। कुछ लक्जेटिव के अति प्रयोग से इनपर निर्भरता और मल त्याग की कार्य क्षमता (bowel function) में कमी हो सकती है, इसलिए किसी भी लक्जेटिव का उपयोग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से बातचीत करना सुनिश्चित करें।</p>
<p><strong>उत्तेजक औषधियां (oral stimulants) :</strong><br />
उत्तेजक पदार्थ शरीर से मल को बाहर निकालने के लिए आंतों की मांसपेशियों के लयबद्ध संकुचन (rhythmic contractions) को ट्रिगर करते हैं। उदाहरण डुलकोलैक्स और सेनोकोट हैं, जिनके साइड इफेक्ट्स में डकार, ऐंठन, दस्त, मतली और मूत्र का रंग बदलना शामिल हो सकता है।</p>
<p><strong>रेक्टल सपोसिटरीज़ (rectal suppositories) :</strong><br />
सपोसिटरीज आंतों की मांसपेशियों के लयबद्ध संकुचन को ट्रिगर करने और मल को नरम करने का एक बहुत ही सीधा तरीका है। Dulcolax और Pedia-Lax दो लोकप्रिय ब्रांड हैं। साइड इफेक्ट्स में मलाशय में जलन, दस्त और ऐंठन शामिल हो सकते हैं।</p>
<p><strong>मल त्याग में समय लगाएं :</strong><br />
शौच करते समय स्क्वाट पोजीशन में आना, शौच करने की कोशिश करते समय अत्यधिक फायदेमंद हो सकता है। शौच करने की आवश्यकता होने पर अपने बाथरूम में एक छोटा सा फुटस्टूल ले आएं। शौच करते समय अपने पैरों को शौचालय के सामने एक स्टूल पर रखें &#8211; ताकि आपका शरीर अनिवार्य रूप से बैठने की स्थिति के बजाय बैठने की स्थिति में हो &#8211; आपको बिना तनाव के मल पास करने में मदद कर सकता है।</p>
<p><strong>शराब से बचें :</strong><br />
शराब एंटीडाययूरेटिक हार्मोन के स्राव को कम करने का काम करती है, जो शरीर को अधिक पानी बनाए रखने का संकेत है। जब किसी व्यक्ति में यह हार्मोन कम होता है, तो वह अधिक पेशाब करता है। इस प्रकार, शराब के सेवन से निर्जलीकरण (dehydration) कब्ज में योगदान कर सकता है क्योंकि शरीर को मल को अवशोषित करने और मोबाइल रहने के लिए पानी की आवश्यकता होती है। शराब पीने से पेरिस्टलसिस पर एक निरोधात्मक प्रभाव हो सकता है, जिसका अर्थ है कि यह गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल गतिशीलता को धीमा कर सकता है।<br />
जीवनशैली में बदलाव जो आपको नियमित रूप से शौच करने में मदद कर सकते हैं :</p>
<p>इन सभी परिवर्तनों को एक बार में करने का प्रयास न करें, लेकिन यहां आपके दैनिक दिनचर्या में शामिल करने के लिए सुझावों की एक सूची दी गई है। ये छोटे-छोटे बदलाव कब्ज में सुधार करने में मदद कर सकते हैं ।<br />
• प्रतिदिन लगभग नियत समय पर भोजन करें।<br />
• उठने के तुरंत बाद एक बड़ा गिलास पानी पिएं।<br />
• कुछ सुबह अपने नाश्ते में चोकर युक्त अनाज शामिल करने का प्रयास करें।<br />
• नाश्ते के बाद थोड़ा हल्का व्यायाम (चलना जितना आसान) करें।<br />
• बीन्स और फलियां जैसे उच्च फाइबर वाले खाद्य पदार्थों का उपयोग करें।<br />
• नाश्ते के रूप में काम पर लाने के लिए फल का एक टुकड़ा पैक करें।<br />
• अपनी सफेद ब्रेड के स्थान पर पूरी गेहूं की रोटी लें।<br />
• पूरी नींद लें।<br />
• अगर आपको शौच करने की इच्छा है, तो इसका विरोध न करें या इसे &#8216;पकड़&#8217; न दें।<br />
• मल त्याग के लिए नियमित अंतराल और समय निर्धारित करने का प्रयास करें।</p>
<p><strong>डॉक्टर को कब सम्पर्क करें ?</strong><br />
यदि कब्ज कभी भी गंभीर या लगातार पेट दर्द, उल्टी, मल में रक्त या महत्वपूर्ण सूजन जैसे लक्षणों के साथ होता है, तो चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, यदि कब्ज तीन सप्ताह से अधिक समय तक बना रहता है, तो उपचार के विकल्पों के बारे में अपने डॉक्टर से बात करने का समय आ गया है ।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आंत-मस्तिष्क कनेक्शन</title>
		<link>https://drakashmathur.com/11-3/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[drakashmathur]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jul 2024 07:42:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Media Articles]]></category>
		<category><![CDATA[पाचन : सामान्य जानकारियां]]></category>
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					<description><![CDATA[अपने आंत-मस्तिष्क कनेक्शन पर ध्यान दें &#8211; यह आपकी चिंता (anxiety) और पाचन समस्याओं में योगदान कर सकता है आंत-मस्तिष्क [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अपने आंत-मस्तिष्क कनेक्शन पर ध्यान दें &#8211; यह आपकी चिंता (anxiety) और पाचन समस्याओं में योगदान कर सकता है आंत-मस्तिष्क का संबंध कोई मज़ाक नहीं है; यह चिंता को पेट की समस्याओं से जोड़ सकता है और इसके विपरीत भी।</p>
<p>क्या आपने कभी &#8220;आंत-रिंचिंग&#8221; (gut wrenching) अनुभव किया है? क्या कुछ स्थितियां आपको &#8220;मिचली&#8221; (nauseous) महसूस करवाती हैं? क्या आपने कभी अपने पेट में &#8220;तितलियों&#8221; को महसूस किया है? हम इन भावों का उपयोग एक कारण से करते हैं। जठरांत्र  संबंधी मार्ग (gastrointestinal tract)भावनाओं के प्रति संवेदनशील है। क्रोध, चिंता, उदासी, उत्साह &#8211; ये सभी भावनाएँ (और अन्य) आंत में लक्षणों को ट्रिगर कर सकती हैं।</p>
<p>मस्तिष्क का सीधा असर पेट और आंतों पर पड़ता है। उदाहरण के लिए, खाने का विचार ही भोजन के पहुंचने से पहले पेट के रस को छोड़ सकता है। यह कनेक्शन दोनों तरह से जाता है। एक असहजआंत (troubled intestine) मस्तिष्क को संकेत भेज सकती है, जैसे एक परेशान मस्तिष्क आंत को संकेत भेज सकता है। इसलिए, किसी व्यक्ति का पेट या आंतों की परेशानी चिंता, तनाव या अवसाद का कारण या उत्पाद हो सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मस्तिष्क और जठरांत्र (जीआई) प्रणाली घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई हैं।यह उन मामलों में विशेष रूप से सच है जहां कोई व्यक्ति बिना किसी स्पष्ट शारीरिक कारण के जठरांत्र संबंधी परेशानी का अनुभव करता है। ऐसे कार्यात्मक जीआई विकारों के लिए, तनाव और भावना की भूमिका पर विचार किए बिना एक व्यथित आंत (distressed gut)को ठीक करने का प्रयास करना मुश्किल है।</p>
<p><strong>आंत स्वास्थ्य और चिंता (Gut health and anxiety) :</strong><br />
यह देखते हुए कि आंत और मस्तिष्क कितनी बारीकी से परस्पर क्रिया करते हैं, यह समझना आसान हो जाता है कि प्रस्तुति (presentation) देने से पहले आपको मतली क्यों महसूस हो सकती है, या तनाव के समय में आंतों में दर्द महसूस हो सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कार्यात्मक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्थितियां काल्पनिक हैं या &#8220;सब कुछ आपके सिर में है।&#8221; मनोविज्ञान दर्द और अन्य आंत्र लक्षणों का कारण बनने के लिए शारीरिक कारकों के साथ जुड़ता है। मनोसामाजिक कारक आंत के वास्तविक शरीर क्रिया विज्ञान (physiology) के साथ-साथ लक्षणों को भी प्रभावित करते हैं। दूसरे शब्दों में, तनाव (या अवसाद या अन्य मनोवैज्ञानिक कारक) जीआई पथ के मूवमेंट्स और संकुचन (movements and contractions) को प्रभावित कर सकते हैं।</p>
<p>इसके अलावा, कार्यात्मक जीआई विकार वाले कई लोग अन्य लोगों की तुलना में अधिक तीव्रता से दर्द का अनुभव करते हैं क्योंकि उनका मस्तिष्क जीआई पथ से दर्द संकेतों के प्रति अधिक प्रतिक्रियाशील होता है। तनाव मौजूदा दर्द को और भी बदतर बना सकता है।<br />
इन अवलोकनों के आधार पर, आप उम्मीद कर सकते हैं कि कार्यात्मक जीआई स्थितियों वाले कम से कम कुछ रोगियों में तनाव कम करने या चिंता या अवसाद का इलाज करने के लिए चिकित्सा के साथ सुधार हो सकता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि मनोवैज्ञानिक रूप से आधारित उपचार केवल पारंपरिक चिकित्सा उपचार की तुलना में पाचन विकारों में अधिक सुधार लाते हैं।</p>
<p>आंत-मस्तिष्क कनेक्शन, चिंता और पाचन क्या आपके पेट या आंतों की समस्याएं &#8211; जैसे कि जलन (heart burn), पेट में ऐंठन, या तरल मल (loose stools) &#8211; तनाव से संबंधित हैं? इन और तनाव के अन्य सामान्य लक्षणों पर ध्यान दें और अपने डॉक्टर से चर्चा करें। साथ में आप अपने जीवन में तनाव से निपटने में मदद करने के उपाय करके अपनी पाचन संबंधी समस्याओं को कम कर सकते हैं।</p>
<p>चूंकि तनाव और पाचन समस्याओं का संबंध हो सकता है अतः ऐसे में इनके समाधान के लिए दोनों का सम्मिलित उपचार करना लाभप्रद सिद्ध होगा।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>अपने आहार में शामिल करने के लिए 15 सर्वश्रेष्ठ प्रीबायोटिक्स</title>
		<link>https://drakashmathur.com/10-3/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[drakashmathur]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jul 2024 07:42:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Media Articles]]></category>
		<category><![CDATA[विविध,एंडोस्कोपी आदि]]></category>
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					<description><![CDATA[हम सभी ने प्रोबायोटिक्स के बारे में सुना है, लेकिन प्रीबायोटिक्स के बारे में क्या? यहां हम प्रीबायोटिक्स पर विस्तृत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हम सभी ने प्रोबायोटिक्स के बारे में सुना है, लेकिन प्रीबायोटिक्स के बारे में क्या?</strong><br />
यहां हम प्रीबायोटिक्स पर विस्तृत चर्चा करेंगे। हम आपको पाचन में सहायता के लिए आहार में शामिल करने के लिए 15 सर्वश्रेष्ठ प्रीबायोटिक्स भी बताएंगे ।</p>
<p>एक स्वस्थ आंत माइक्रोबायोम को बनाए रखने के महत्व पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। आंत माइक्रोबायोम में खरबों सूक्ष्मजीव होते हैं, जिनमें से अधिकांश बैक्टीरिया होते हैं, और हमारे स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं में एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं।</p>
<p>जब आंत के स्वास्थ्य की बात आती है तो प्रोबायोटिक्स और फाइबर के बारे में खूब बात होती  है, लेकिन हमारी आंतों में  लाभकारी बैक्टीरिया को खिलाने के लिए, हमें पर्याप्त प्रीबायोटिक्स खाने की भी आवश्यकता है।</p>
<p>प्रोबायोटिक्स के विपरीत, प्रीबायोटिक्स जीवित सूक्ष्मजीव नहीं होते हैं, और हालांकि अधिकांश प्रीबायोटिक्स विभिन्न प्रकार के फाइबर होते हैं, सभी प्रीबायोटिक्स फाइबर नहीं होते हैं। तो, वे वास्तव में क्या हैं और सबसे अच्छे प्रीबायोटिक्स कौन से हैं जिनका आप सेवन कर सकते हैं?</p>
<p><strong>प्रीबायोटिक्स के लाभ :</strong><br />
प्रीबायोटिक्स को ऐसे सबस्ट्रेट्स के रूप में परिभाषित किया जाता है जो आंत माइक्रोबायोटा द्वारा चुनिंदा रूप से उपयोग किए जाते हैं जो मेजबान (यानी हम इंसानों!) के लिए स्वास्थ्य लाभ उत्पन्न करते हैं। सब्सट्रेट ऐसे अणु होते हैं जिन पर एंजाइम कार्य करते हैं और इसमें अपचनीय फाइबर, पॉलीफेनोल्स और पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड शामिल हो सकते हैं।</p>
<p>संक्षेप में, प्रीबायोटिक्स हमारी आंत में लाभकारी रोगाणुओं के लिए भोजन के रूप में काम करते हैं जिसके परिणामस्वरूप लाभकारी मेटाबोलाइट्स का उत्पादन होता है। इनमें अन्य स्वास्थ्य लाभों के साथ-साथ मनुष्यों के लिए विरोधी भड़काऊ और कैंसर विरोधी गुण हैं।<br />
“जिन खाद्य पदार्थों में उच्च स्तर के पॉलीफेनोल्स होते हैं, वे कुछ बेहतरीन प्रीबायोटिक्स के रूप में कार्य करते हैं। इनमें डार्क चॉकलेट, ग्रीन टी, रेड वाइन और बेरी शामिल हैं।”</p>
<p>यूके के शोधकर्ता ग्लेन आर गिब्सन (जिन्होंने वैज्ञानिक दुनिया के लिए प्रीबायोटिक्स शब्द पेश किया) के अनुसार, &#8220;प्रीबायोटिक्स सुरक्षित, प्रभावोत्पादक और उपयोगकर्ता के अनुकूल हैं। उन्हें मौजूदा चिकित्सा के सहायक के रूप में रोगनिरोधी रूप से [और] भी इस्तेमाल किया जा सकता है।&#8221; दरअसल, भारत में नियमित रूप से प्रीबायोटिक्स का सेवन करने के कुछ सिद्ध स्वास्थ्य लाभ :<br />
• बेहतर प्रतिरक्षा स्वास्थ्य और कम सूजन<br />
• दस्त और कब्ज में कमी<br />
• एलर्जी का कम जोखिम<br />
• बेहतर खनिज अवशोषण<br />
• बेहतर चयापचय स्वास्थ्य (improved metabolic health) (इंसुलिन प्रतिरोध, रक्त लिपिड स्तर)<br />
• बढ़ी हुई तृप्ति (satiely)<br />
• हृदय रोग और पेट के कैंसर के साथ-साथ इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) और क्रोहन रोग के खिलाफ सुरक्षात्मक प्रभाव।</p>
<p>प्रीबायोटिक्स का कम सेवन मानव आंत के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप शॉर्ट चेन फैटी एसिड का उत्पादन कम होता है, आंतों की पारगम्यता बढ़ जाती है और रोगज़नक़ संक्रमण बढ़ जाता है।</p>
<p>आम प्रीबायोटिक फाइबर में शामिल हैं: इनुलिन, मानव दूध ओलिगोसेकेराइड्स जो स्वाभाविक रूप से स्तन के दूध में पाए जाते हैं, गैलाटो-ऑलिगोसेकेराइड्स (जीओएस), और फ्रुक्टो-ऑलगियोसेकेराइड्स (एफओएस)। सौभाग्य से, प्रीबायोटिक्स विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं। तो, आपके लिए उपभोग करने के लिए सबसे अच्छे कौन से हैं?</p>
<p><strong>15 सर्वश्रेष्ठ प्रीबायोटिक्स :</strong><br />
हम सबसे फायदेमंद प्रीबायोटिक्स को चार मुख्य खाद्य समूहों में विभाजित कर सकते हैं: सब्जियां, फल, फलियां/अनाज और बीज। प्रत्येक समूह से कुछ को अपने आहार में शामिल करने का प्रयास करें &#8211; उन्हें नियमित रूप से खाएं और आपको लाभ महसूस होना शुरू हो जाएगा।</p>
<p><strong>सब्जियां</strong><br />
<strong>1. प्याज (Onions)</strong><br />
प्रमुख सब्जी और खरीदने में सस्ता, प्याज पॉलीफेनोल क्वेरसेटिन से भरपूर होता है और इसमें वजन के हिसाब से लगभग 10 प्रतिशत इन्यूलिन फाइबर होता है। इनमें प्रीबायोटिक्स फ्रकटन और एफओएस भी होते हैं। इन दोनों को लाभकारी बैक्टीरिया की मात्रा और आंतों में शॉर्ट चेन फैटी एसिड ब्यूटायरेट उत्पादन को बढ़ाने के लिए दिखाया गया है।<br />
<strong>2. लीक्स ( Leaks)</strong><br />
प्याज़ की तरह लीक भी एलियम परिवार से संबंधित हैं और इनमें वजन के हिसाब से 16 प्रतिशत तक इंसुलिन फाइबर होता है। लीक में एंटीऑक्सीडेंट केम्पफेरोल भी अधिक होता है जिसमें कैंसर रोधी, सूजन रोधी और रोगाणुरोधी गुण होते हैं। इसके अलावा, वे विटामिन बी 6, सी और के, साथ ही फोलेट और मैंगनीज में भी समृद्ध हैं।<br />
<strong>3. लहसुन (Garlic)</strong><br />
एक स्वादिष्ट मसाला जिसमें रोगाणुरोधी प्रभाव होता है, लहसुन सबसे अच्छे प्रीबायोटिक्स में से एक है जिसे आप अपने आहार में शामिल कर सकते हैं। इसमें इनुलिन और एफओएस होता है और यह फायदेमंद बिफीडोबैक्टीरिया के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए पाया गया है और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोग को कम कर सकता है। लहसुन को कच्ची अवस्था में खाने से आपकी प्रतिरक्षा और पाचन तंत्र के लिए और भी अधिक स्वास्थ्य लाभ होते हैं।<br />
<strong>4. जेरूसलम आटिचोक (Jerusalem artichokes)</strong><br />
हालांकि उनका नाम धोखा दे रहा है, यह कंद सब्जी वास्तव में सूरजमुखी से संबंधित है न कि ग्लोब आर्टिचोक। जेरूसलम आटिचोक में इंसुलिन की मात्रा अधिक होती है जो लाभकारी बैक्टीरिया को खिलाती है और इसे पका या कच्चा खाया जा सकता है।<br />
<strong>5. कासनी जड़ (Chickory root)</strong><br />
चिकोरी की जड़ प्रीबायोटिक इनुलिन के सबसे समृद्ध स्रोतों में से एक है और इसे अक्सर कैफीन मुक्त कॉफी प्रतिस्थापन के रूप में उपयोग किया जाता है। कासनी कब्ज को कम कर सकती है, लाभकारी बिफीडोबैक्टीरिया को बढ़ा सकती है और आंत के कार्य में सुधार कर सकती है। अविश्वसनीय रूप से, इसमें वजन के हिसाब से लगभग 65 प्रतिशत फाइबर होता है, जो इसे आपके द्वारा उपभोग किए जा सकने वाले सर्वोत्तम प्रीबायोटिक्स में से एक बनाता है।<br />
&#8220;एक स्वादिष्ट मसाला जिसमें रोगाणुरोधी प्रभाव होता है, लहसुन सबसे अच्छे प्रीबायोटिक्स में से एक है जिसे आप अपने आहार में शामिल कर सकते हैं। इसे कच्चा खाने से आपकी प्रतिरक्षा और पाचन तंत्र के लिए और भी अधिक स्वास्थ्य लाभ होते हैं।&#8221;<br />
<strong>6. शतावरी (Asparagus)</strong><br />
शतावरी एंटीऑक्सिडेंट और फाइबर में समृद्ध है, विशेष रूप से इनुलिन। इसके अलावा, शतावरी में पाए जाने वाले पॉलीसेकेराइड यकृत कैंसर के खिलाफ सुरक्षात्मक हो सकते हैं। कच्चे खाने पर इसके प्रीबायोटिक लाभ अधिक शक्तिशाली होते हैं।<br />
फल<br />
<strong>7. केले (Banana)</strong><br />
केले कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और खनिजों से भरपूर होते हैं। केले के सेवन से आंत में लाभकारी बिफीडोबैक्टीरिया को बढ़ाने के लिए दिखाया गया है। वास्तव में, कच्चे हरे केले खाने से और भी अधिक लाभ मिल सकते हैं क्योंकि उनमें उच्च मात्रा में प्रतिरोधी स्टार्च होता है, जो प्रीबायोटिक प्रभाव डालता है, और इंसुलिन प्रतिरोध को भी कम कर सकता है।<br />
<strong>8. सेब (Apple)</strong><br />
सेब एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन ए, सी, ई, फोलेट, और पोटेशियम के साथ-साथ फाइबर पेक्टिन में उच्च होते हैं। सेब में फाइबर के साथ उनकी फिनोल सामग्री &#8211; जिसका आंत पर प्रीबायोटिक प्रभाव पड़ता है &#8211; पाचन और लिपिड चयापचय में सुधार कर सकता है। सबसे अधिक पोषण लाभ के लिए, उस छिलके का सेवन करना सुनिश्चित करें जहां एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा सबसे अधिक हो।<br />
पारंपरिक रूप से उगाए गए सेबों की तुलना में, जैविक सेब में कम रोगजनक बैक्टीरिया और लैक्टोबैसिली जैसे अधिक लाभकारी बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो अतिरिक्त प्रोबायोटिक्स प्रदान करते हैं। तो, सेब के रस को छोड़ दें और सर्वोत्तम प्रीबायोटिक लाभों के लिए पूरे फल का सेवन करें।<br />
<strong>फलियां और अनाज</strong><br />
<strong>9. छोला (Chickpeas)</strong><br />
अन्य फलियां जैसे दाल और बीन्स की तरह छोले में विभिन्न प्रकार के प्रीबायोटिक फाइबर होते हैं, जिनमें एफओएस, जीओएस और फ्रुक्टेन शामिल हैं। जीओएस के सेवन से आंत में बिफीडोबैक्टीरिया का स्तर बढ़ सकता है, जबकि फ्रुक्टेन्स को लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया को बढ़ाने के लिए दिखाया गया है। अपने प्रीबायोटिक लाभों का आनंद लेने के लिए, छोले को उबला हुआ, डिब्बाबंद खाया जा सकता है या पके हुए माल में आटे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।<br />
<strong>10. गेहूं की भूसी (Wheat bran)</strong><br />
गेहूं का चोकर गेहूं की गिरी की कठोर बाहरी परत है और न केवल फाइबर में बल्कि स्टार्च, प्रोटीन, विटामिन और खनिजों में भी उच्च है। यह पश्चिमी देशों में अनाज के फाइबर सेवन का एक प्रमुख स्रोत है और सबसे अच्छे प्रीबायोटिक्स में से एक है क्योंकि इसमें अरबीनॉक्सिलन-ऑलिगोसेकेराइड होते हैं। ये एक स्पष्ट प्रीबायोटिक प्रभाव डालते हैं जो मल और पारगमन में सुधार कर सकते हैं, एक स्वस्थ आंत वातावरण का नेतृत्व कर सकते हैं, और लाभकारी बैक्टीरिया की मात्रा के साथ-साथ आंत में शॉर्ट चेन फैटी एसिड उत्पादन में वृद्धि कर सकते हैं।<br />
<strong>11. ओट्स (Oats)</strong><br />
ओट्स में बीटा-ग्लुकन नामक अध्ययन किए गए सर्वोत्तम प्रीबायोटिक्स में से एक होता है। सभी प्रकार के जई में से, जई के चोकर में सबसे अधिक फाइबर और बीटा-ग्लूकन सामग्री होती है। जई में प्रीबायोटिक्स को आंत में फायदेमंद बिफीडोबैक्टीरिया प्रजातियों को बढ़ाने के लिए दिखाया गया है, जो प्लाज्मा कोलेस्ट्रॉल सांद्रता को भी कम कर सकता है। दलिया दलिया का सेवन आंत माइक्रोबायोटा संरचना में सुधार करने के लिए भी दिखाया गया है। जई में पाए जाने वाले बीटा-ग्लूकेन में कैंसर रोधी गुण भी होते हैं और यह रक्त शर्करा में सुधार कर सकता है।<br />
<strong>12. जौ (Barley)</strong><br />
जौ, जई और गेहूं की तरह, प्रीबायोटिक बीटा-ग्लूकन होता है और यह रक्त शर्करा को भी कम कर सकता है। इसके अतिरिक्त, अध्ययनों से पता चला है कि जौ आंत में शॉर्ट चेन फैटी एसिड उत्पादन को बढ़ा सकता है और आंत माइक्रोबायोटा संरचना को महत्वपूर्ण रूप से बदल सकता है, जैसे आंत में लैक्टोबैसिलस उपभेदों को बढ़ाना। जौ में पाए जाने वाले बीटा-ग्लूकेन्स को कुल और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए भी दिखाया गया है।<br />
<strong>बीज</strong><br />
<strong>13. अलसी (Flaxseeds)</strong><br />
अलसी के बीज फाइबर, ओमेगा 3 फैटी एसिड अल्फा लिनोलिक एसिड (ALA), लिग्नान और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होते हैं जो नियमित मल त्याग को बढ़ावा देते हैं और रक्त शर्करा को नियंत्रित करते हैं। एक अध्ययन से पता चला है कि आंत माइक्रोबायोटा ने अलसी के रेशे को शॉर्ट चेन फैटी एसिड में किण्वित किया जो मोटापे के खिलाफ सुरक्षात्मक थे।<br />
इसकी उच्च ओमेगा 3 सामग्री के कारण, अलसी को कच्चा खाना सबसे अच्छा है ताकि खाना पकाने में फैटी एसिड का ऑक्सीकरण न हो। लिग्नान कुछ कैंसर, विशेष रूप से हार्मोन से संबंधित कैंसर को रोक सकते हैं, क्योंकि वे एस्ट्रोजन के स्तर को नियंत्रित करने के लिए पाए गए हैं।<br />
<strong>14. अखरोट (Walnuts)</strong><br />
अखरोट विटामिन, खनिज, एंटीऑक्सिडेंट और एएलए सहित आवश्यक फैटी एसिड से भरे होते हैं। अखरोट का नियमित रूप से सेवन (43 ग्राम / दिन, या लगभग 3 ऑउंस) आंत में प्रोबायोटिक और ब्यूटिरिक एसिड-उत्पादक प्रजातियों को बढ़ाने के लिए दिखाया गया है। इसकी फाइबर सामग्री के अलावा, अखरोट, एलागिटैनिन में मुख्य पॉलीफेनोल्स से प्रीबायोटिक प्रभाव आ सकता है। आंत माइक्रोबायोटा संरचना को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने के अलावा, अखरोट एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को भी कम कर सकते हैं।<br />
अन्य</p>
<p><strong>15. पॉलीफेनोल्स (Polyphenols)</strong><br />
पॉलीफेनोल्स पौधे के अस्तित्व के लिए आवश्यक पौधे के घटक हैं जो हमारे समग्र स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाते हैं और हाल ही में आंत माइक्रोबायोटा पर प्रीबायोटिक प्रभाव पाए गए हैं। आम पॉलीफेनोल्स अक्सर तथाकथित &#8220;सुपरफूड्स&#8221; में पाए जाते हैं जिनमें फ्लेवोनोइड्स, टैनिन, करक्यूमिन और रेस्वेराट्रोल शामिल हैं। जिन खाद्य पदार्थों में उच्च स्तर के पॉलीफेनोल्स होते हैं जो कुछ बेहतरीन प्रीबायोटिक्स के रूप में कार्य करते हैं, उनमें डार्क चॉकलेट, कैफीनयुक्त और डिकैफ़िनेटेड ग्रीन टी, रेड वाइन और बेरी शामिल हैं।</p>
<p>उदाहरण के लिए, कोको फ्लेवोनोल्स का सेवन आंत में फायदेमंद बिफीडोबैक्टीरिया और लैक्टोबैसिली को बढ़ाने के लिए दिखाया गया है। पॉलीफेनोल्स के अन्य लाभों में सूजन और रोगजनक बैक्टीरिया को कम करना और आंत में शॉर्ट चेन फैटी एसिड का उत्पादन बढ़ाना शामिल है। उनके पास आंत में रोगाणुरोधी गुण भी होते हैं और वे हृदय स्वास्थ्य में भी सुधार कर सकते हैं।</p>
<p><strong>राउंड अप:</strong> सर्वश्रेष्ठ प्रीबायोटिक्स फाइबर के सेवन से आंत के माइक्रोबायोम और पाचन स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने के बावजूद, पश्चिमी देशों में अधिकांश लोग प्रतिदिन अनुशंसित 25-30 ग्राम फाइबर का सेवन नहीं करते हैं। इसके अतिरिक्त, कम कार्ब आहार लोकप्रिय हो गए हैं जो आंत पर हानिकारक प्रभाव डाल सकते हैं क्योंकि वे सबसे अच्छे प्रीबायोटिक्स में कम होते हैं। वर्तमान अध्ययनों से पता चलता है कि उनके स्वास्थ्य लाभों का अनुभव करने के लिए एक दिन में 2.5-10 ग्राम प्रीबायोटिक्स का सेवन करना आवश्यक है। दूसरी ओर, उच्च खुराक (40-50 ग्राम / दिन) का सेवन करने से गैस और दस्त हो सकते हैं, इसलिए उन्हें अपने आहार में शामिल करते समय सावधान रहें।</p>
<p>हालांकि कई प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ जैसे कि दही या शिशु फार्मूला में अब प्रीबायोटिक्स होते हैं, अपने आहार में कुछ सर्वश्रेष्ठ प्रीबायोटिक्स को शामिल करने पर ध्यान केंद्रित करना आपके संपूर्ण आंत और शारीरिक स्वास्थ्य को सपोर्ट करने का एक आसान और प्रभावी तरीका है।</p>
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]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>स्वस्थ आंत</title>
		<link>https://drakashmathur.com/media-article-9/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[drakashmathur]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jul 2024 07:41:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Media Articles]]></category>
		<category><![CDATA[पाचन : सामान्य जानकारियां]]></category>
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					<description><![CDATA[जानिए आंत और पेट को कैसे रखें स्वस्थ? आंतों को स्वस्थ बनाने के लिए अपनाएं ये 3 आसान उपाय एबीपी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जानिए आंत और पेट को कैसे रखें स्वस्थ?</strong><br />
आंतों को स्वस्थ बनाने के लिए अपनाएं ये 3 आसान उपाय एबीपी न्यूज से साभार</p>
<p>शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आंतों को स्वस्थ रखना बहुत जरूरी है. इसलिए आपको अपने खाने-पीने में ऐसे आहार को शामिल करना चाहिए जिससे आपकी आंत स्वस्थ रहें. जानिए आंतों स्वास्थ्य रखने के 3 आसान तरीके :</p>
<p>आंत हमारे पाचन तंत्र का महत्वपूर्ण अंग हैं. छोटी आंत और बड़ी आंत दोनों ही हमारी पाचन क्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. आंत का काम हमारे खाने से स्वस्थ और पौष्टिक चीजों को पचाने का है. बाकी खराब पदार्थ को शरीर से बाहर निकालने का काम भी आंत करती हैं. आंत हमारे पूरे शरीर को पोषक तत्व पहुंचाती है. लेकिन आपकी आंत सही तरीके से काम करें इसके लिए जरूरी है कि आप आंत के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें. अगर आंत में कोई समस्या पैदा होती है तो इससे हमारा पाचन तंत्र सबसे पहले प्रभावित होता है. पाचन तंत्र कमजोर होने के कारण हमारी इम्युनिटी कमजोर होती है और इंफेक्शन या किसी दूसरी तरह की समस्याएं शरीर को घेर लेती हैं.</p>
<p>एक स्वस्थ आंत, आपको स्वस्थ पाचन तंत्र और आंत में स्वस्थ बैक्टीरिया और प्रतिरक्षा कोशिकाओं को बढ़ाने का काम करती है. आंत आपको कई तरह के बैक्टीरिया और वायरस संक्रमण से भी बचाती है. इसके अलावा आंत का संबंध दिमाग से भी जुड़ा है. इसमें कुछ रसायन और न्यूरोट्रांसमीटर आपकी भावनाओं को कंट्रोल करते हैं. ऐसे में आप जो खाते हैं उससे पता चलता है कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं. और उसी हिसाब से आप व्यवहार करते हैं. इसीलिए आपको ऐसा खाना खाना चाहिए जिसे खाकर आप और आपकी आंत दोनों खुश हो जाएं. तो आज हम आपको आंत को स्वस्थ रखने के कुछ आसान तरीके बता रहे हैं.<br />
<strong><br />
1- आंतों को स्वस्थ रखने वाला खाना खाएं</strong><br />
अगर आपको अपनी आंतों को सुरक्षित रखना है तो आपको अपने खानपान में बदलाव करने होंगे. आतों स्वस्थ रखने और बीमारियों से लड़ने में मदद करने वाले कुछ खाद्य पदार्थ हैं, जो आपके स्वास्थ्य भी रखते हैं और आंतों के लिए भी फायदेमंद हैं. सबसे पहले आपको अपने खाने में कच्ची, उबली और पकी सब्जियों को शामिल करना चाहिए. कुछ फलों, नट्स, स्प्राउट्स और प्रीबायोटिक्स और प्रोबायोटिक्स से भरपूर खाना खाएं. बता दें कि प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स से भरपूर भोजन आंतों में गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं. इसके अलावा आप खाने में कलरफुल फल-सब्जियों को शामिल करें. प्रीबायोटिक्स और प्रोबायोटिक्स वाला खाना जैसे दही, फर्मेन्टेड डेयरी फूड, बकरी का दूध और फर्मेन्टड केफिर, माइक्रोएलगी, मिसो सूप, सौरक्राउट, या अचार खाने में जरूर खाएं. ये खाना आपकी आंतो के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है.<br />
<strong><br />
2- खाने में प्रोटीन जरूर शामिल करें</strong><br />
आंतों को स्वस्थ रखने की बात हो तो आपको खाने में प्रोटीन का सेवन जरूर करना चाहिए. प्रोटीन बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. आप दिन की दो मील में प्रोटीन जैसे पनीर, दालें, साबुत अनाज या अंडा जरूर शामिल करें. इसके अलावा आप डाइट में फल-सब्जियों को भी शामिल करें. प्रोटीन आपके पेट को स्वस्थ रखता है. इसके अलावा प्रोटीन वजन घटाने में भी हेल्पफुल होता है.</p>
<p><strong>3- अपनी दिनचर्या का पालन करें</strong><br />
अगर आपकी दिनचर्या सही है तो आधी बामारियां आपसे दूर भाग जाएंगी. जी हां अगर आपको अपनी आंतों का भी विशेष ख्याल रखना है तो एक सही दिनचर्या को फॉलो करें. इसके आपकी आंतों का स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा. आपको अपने जगने, व्यायाम करने, खाने और सोने का समय निर्धारित करना होगा. अगर आप उस रूटीन को फॉलो करते हैं तो आप स्वस्थ रह सकते हैं. इसके अलावा बाहर के खाने, ज्यादा मीठा खाने या फिर फ्राइड फूड्स से बचें. अपने खाने में डेयरी प्रॉडक्ट को ज्यादा से ज्यादा शामिल करें. इससे आप भी स्वस्थ्य रहेंगे और आपकी आंतों स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>संतुलित आहार</title>
		<link>https://drakashmathur.com/8-3/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[drakashmathur]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jul 2024 07:40:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Media Articles]]></category>
		<category><![CDATA[पाचन : सामान्य जानकारियां]]></category>
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					<description><![CDATA[सेहत और लंबी उम्र के लिए क्या खाना चाहिए? • हम सभी जानते हैं कि हमारे खाने की थाली में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सेहत और लंबी उम्र के लिए क्या खाना चाहिए?<br />
</strong><br />
• हम सभी जानते हैं कि हमारे खाने की थाली में आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में होने चाहिए।<br />
• वे कौन से खाद्य स्रोत हैं जिनमें वे होते हैं और हमें कितना खाना चाहिए?<br />
• आपके कुल भोजन का कितना हिस्सा प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, फाइबर आदि होना चाहिए।<br />
भोजन की थाली की संरचना या डिजाइन कैसे करें ताकि सभी आवश्यक घटकों को शामिल किया जा सके। सनक आहार या कीटो या शाकाहारी आदि जैसे विशेष आहारों से परे, एक रचना है जो परिभाषित कर सकती है कि हमें अपने भोजन में आदर्श रूप से क्या शामिल करना चाहिए। और हमेशा की तरह, स्वास्थ्य मामलों में अनुसंधान के प्रमुख प्रकाश &#8211; हार्वर्ड के शोधकर्ताओं के पास इसका उत्तर है।</p>
<p><strong>हार्वर्ड स्वस्थ भोजन प्लेट:</strong><br />
थाली को गाइड के रूप में इस्तेमाल करें, ज्यादातर सब्जियां, फल और साबुत अनाज, स्वस्थ वसा और स्वस्थ प्रोटीन खाएं। लेकिन इसके अलावा, मीठे पेय पदार्थों को ना कहें, इसके बजाय सादे पीने के पानी का विकल्प चुनें। सबसे महत्वपूर्ण बात, याद रखें कि सक्रिय रहना और स्वस्थ वजन बनाए रखना आवश्यक है।<br />
अपने भोजन में अधिकतर सब्जियां और फल- अपनी प्लेट का आधा हिस्सा बनाएं।<br />
रंग और विविधता के लिए लक्ष्य रखें, और याद रखें कि आलू और फ्रेंच फ्राइज़ को स्वस्थ खाने की प्लेट में सब्जियों के रूप में नहीं गिना जाता है क्योंकि रक्त शर्करा पर उनके नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। इसकी जगह बीन्स, मटर और दाल को शामिल करें। फाइबर, एक जटिल कार्बोहाइड्रेट, प्राकृतिक रूप से फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और पकी हुई सूखी फलियों और मटर में पाया जाता है।</p>
<p><strong>साबुत अनाज लें &#8211; अपनी प्लेट का ।</strong><br />
दलिया एक खाद्य पदार्थ है जिससे भारत में हम में से अधिकांश परिचित हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसका इस्तेमाल अलग-अलग व्यंजनों में किया जाता है। कुछ लोग इसे नमक और मसाले जैसे उपमा के साथ पकाते हैं, कुछ अन्य इससे खीर (दलिया) जैसे मीठे पकवान बनाते हैं। यानि पूरा-गेहूं जो आंशिक रूप से टूटा हुआ है। साबुत और बरकरार अनाज- साबुत गेहूं, जौ, गेहूं के जामुन, क्विनोआ, जई, ब्राउन राइस, और उनसे बने खाद्य पदार्थ, जैसे कि साबुत गेहूं का पास्ता- सफेद ब्रेड, सफेद चावल और अन्य की तुलना में रक्त शर्करा और इंसुलिन पर हल्का प्रभाव डालते हैं। परिष्कृत अनाज। अध्ययन की शुरुआत में मधुमेह के बिना 72,000 से अधिक पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाओं के एक बड़े अध्ययन में पाया गया कि साबुत अनाज का सेवन जितना अधिक होगा, टाइप 2 मधुमेह के जोखिम में कमी उतनी ही अधिक होगी।<br />
आपकी थाली के प्रोटीन  &#8211; ¼ की शक्ति।<br />
मछली, मुर्गी पालन, बीन्स और नट्स सभी स्वस्थ, बहुमुखी प्रोटीन स्रोत हैं &#8211; इन्हें सलाद में मिलाया जा सकता है, और एक प्लेट पर सब्जियों के साथ अच्छी तरह से जोड़ा जा सकता है। रेड मीट को सीमित करें, और बेकन और सॉसेज जैसे प्रोसेस्ड मीट से बचें।</p>
<p><strong>स्वस्थ पौधों के तेल &#8211; मॉडरेशन में।</strong><br />
तेल &#8211; वसा का एक स्रोत &#8211; रक्त शर्करा के स्तर पर बहुत कम प्रत्यक्ष प्रभाव डालता है। सभी &#8220;वसा&#8221; खराब नहीं होते हैं और सभी &#8220;कम वसा वाले&#8221; खाद्य पदार्थ अच्छे नहीं होते हैं। संतृप्त वसा (मांस और डेयरी खाद्य पदार्थ) बंद धमनियों और हृदय रोग में योगदान देता है। लेकिन मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड वसा (पौधे और स्वास्थ्यवर्धक तेल) आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, आपके शरीर के लिए एक प्रमुख ऊर्जा स्रोत है, और यह आपको कुछ विटामिन और पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करता है, और आपके कोलेस्ट्रॉल प्रोफाइल में सुधार करता है। इसलिए, जैतून, कैनोला, सोया, मक्का, सूरजमुखी, मूंगफली, और अन्य जैसे स्वस्थ वनस्पति तेलों का चयन करें और आंशिक रूप से हाइड्रोजनीकृत तेलों से बचें, जिनमें अस्वास्थ्यकर ट्रांस वसा होते हैं।</p>
<p><strong>आपको क्या पीना चाहिए?</strong><br />
सुगन्धित पेय निश्चित रूप से एक बड़ी संख्या है। इसके अलावा, दूध और डेयरी उत्पादों को प्रति दिन एक से दो सर्विंग्स तक सीमित करें। जब पोषक तत्वों की बात आती है तो फलों का रस अच्छा नहीं होता क्योंकि उनमें फाइबर की कमी होती है जो कि पूरे फलों में होता है। यदि आपके पास जूस होना चाहिए और फल नहीं, तो इसे प्रति दिन एक छोटे गिलास तक सीमित करें। चाय, कॉफी या सादा सादा पानी पिएं। यूएस फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन स्वस्थ वयस्कों के लिए प्रतिदिन सेवन करने के लिए 400 मिलीग्राम (लगभग 4 कप ब्रूड कॉफ़ी) कैफीन की एक सुरक्षित मात्रा मानता है। हालांकि, अमेरिकन कॉलेज ऑफ ओब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को अपने कैफीन का सेवन एक दिन में 200 मिलीग्राम (लगभग 2 कप ब्रूड कॉफी) तक सीमित रखना चाहिए।</p>
<p><strong>सबसे महत्वपूर्ण बात, &#8220;सक्रिय रहें ::</strong><br />
हेल्दी ईटिंग प्लेट के प्लेसमेट पर लाल रंग की आकृति इस बात की याद दिलाती है कि वजन नियंत्रण में सक्रिय रहना भी महत्वपूर्ण है। यदि आप अच्छी तरह से कैलोरी बर्न नहीं कर रहे हैं तो दुनिया में सभी आहार बेकार हैं और कुछ भी नहीं है। अनुसंधान सक्रिय रहने के लाभों का दृढ़ता से समर्थन करता है। हार्वर्ड की रिपोर्ट कहती है कि सभी उम्र के लोगों के लिए कई तरह की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों के खिलाफ लड़ाई में व्यायाम करने से लाभ मिलता है। हालांकि, व्यस्त जीवन शैली और एक ऐसा वातावरण जो दिन के कई घंटों के लिए गतिहीन रहने को प्रोत्साहित करता है, ने कई लोगों के लिए प्राथमिकता के रूप में व्यायाम की रैंकिंग को कम कर दिया है।<br />
जब आप इन युक्तियों का पालन करते हैं और एक सुखी, केंद्रित और तनाव मुक्त जीवन जीते हैं, तो दीर्घायु और अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है।</p>
<p><strong>हार्वर्ड स्वस्थ भोजन प्लेट:</strong><br />
हार्वर्ड टीएच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के पोषण विशेषज्ञों और हार्वर्ड हेल्थ पब्लिकेशंस के संपादकों द्वारा बनाई गई हेल्दी ईटिंग प्लेट को अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) की माईप्लेट की कमियों को दूर करने के लिए डिजाइन किया गया था। स्वस्थ भोजन प्लेट लोगों को सर्वोत्तम खाने के विकल्प बनाने में मदद करने के लिए, एक सरल प्रारूप में विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान करती है।<br />
हार्वर्ड की टीम जिसने इस हेल्दी ईटिंग प्लेट को डिज़ाइन किया है, वह यह भी सलाह देती है कि किसी को हार्वर्ड की हेल्दी ईटिंग प्लेट द्वारा बताए गए अनुसार केवल खाना खाने से नहीं रुकना चाहिए। इसमें कहा गया है, थाली को गाइड के रूप में इस्तेमाल करें, ज्यादातर सब्जियां, फल और साबुत अनाज, स्वस्थ वसा और स्वस्थ प्रोटीन खाएं। लेकिन इसके अलावा, मीठे पेय पदार्थों को ना कहें, इसके बजाय सादे पीने के पानी का विकल्प चुनें। सबसे महत्वपूर्ण बात, याद रखें कि सक्रिय रहना और स्वस्थ वजन बनाए रखना आवश्यक है।<br />
अपने भोजन में अधिकतर सब्जियां और फल- अपनी प्लेट का आधा हिस्सा बनाएं।<br />
रंग और विविधता के लिए लक्ष्य रखें, और याद रखें कि आलू और फ्रेंच फ्राइज़ को स्वस्थ खाने की प्लेट में सब्जियों के रूप में नहीं गिना जाता है क्योंकि रक्त शर्करा पर उनके नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। इसकी जगह बीन्स, मटर और दाल को शामिल करें। फाइबर, एक जटिल कार्बोहाइड्रेट, प्राकृतिक रूप से फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और पकी हुई सूखी फलियों और मटर में पाया जाता है।</p>
<p><strong>साबुत अनाज लें &#8211; अपनी प्लेट का ।</strong><br />
दलिया एक खाद्य पदार्थ है जिससे भारत में हम में से अधिकांश परिचित हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसका इस्तेमाल अलग-अलग व्यंजनों में किया जाता है। कुछ लोग इसे नमक और मसाले जैसे उपमा के साथ पकाते हैं, कुछ अन्य इससे खीर (दलिया) जैसे मीठे पकवान बनाते हैं। यानि पूरा-गेहूं जो आंशिक रूप से टूटा हुआ है। साबुत और बरकरार अनाज- साबुत गेहूं, जौ, गेहूं के जामुन, क्विनोआ, जई, ब्राउन राइस, और उनसे बने खाद्य पदार्थ, जैसे कि साबुत गेहूं का पास्ता- सफेद ब्रेड, सफेद चावल और अन्य की तुलना में रक्त शर्करा और इंसुलिन पर हल्का प्रभाव डालते हैं। परिष्कृत अनाज। अध्ययन की शुरुआत में मधुमेह के बिना 72,000 से अधिक पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाओं के एक बड़े अध्ययन में पाया गया कि साबुत अनाज का सेवन जितना अधिक होगा, टाइप 2 मधुमेह के जोखिम में कमी उतनी ही अधिक होगी।</p>
<p><strong>आपकी थाली के प्रोटीन  &#8211; ¼ की शक्ति।</strong><br />
मछली, मुर्गी पालन, बीन्स और नट्स सभी स्वस्थ, बहुमुखी प्रोटीन स्रोत हैं &#8211; इन्हें सलाद में मिलाया जा सकता है, और एक प्लेट पर सब्जियों के साथ अच्छी तरह से जोड़ा जा सकता है। रेड मीट को सीमित करें, और बेकन और सॉसेज जैसे प्रोसेस्ड मीट से बचें।<br />
स्वस्थ पौधों के तेल &#8211; मॉडरेशन में।<br />
तेल &#8211; वसा का एक स्रोत &#8211; रक्त शर्करा के स्तर पर बहुत कम प्रत्यक्ष प्रभाव डालता है। सभी &#8220;वसा&#8221; खराब नहीं होते हैं और सभी &#8220;कम वसा वाले&#8221; खाद्य पदार्थ अच्छे नहीं होते हैं। संतृप्त वसा (मांस और डेयरी खाद्य पदार्थ) बंद धमनियों और हृदय रोग में योगदान देता है। लेकिन मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड वसा (पौधे और स्वास्थ्यवर्धक तेल) आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, आपके शरीर के लिए एक प्रमुख ऊर्जा स्रोत है, और यह आपको कुछ विटामिन और पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करता है, और आपके कोलेस्ट्रॉल प्रोफाइल में सुधार करता है। इसलिए, जैतून, कैनोला, सोया, मक्का, सूरजमुखी, मूंगफली, और अन्य जैसे स्वस्थ वनस्पति तेलों का चयन करें और आंशिक रूप से हाइड्रोजनीकृत तेलों से बचें, जिनमें अस्वास्थ्यकर ट्रांस वसा होते हैं।</p>
<p><strong>आपको क्या पीना चाहिए?</strong><br />
सुगन्धित पेय निश्चित रूप से एक बड़ी संख्या है। इसके अलावा, दूध और डेयरी उत्पादों को प्रति दिन एक से दो सर्विंग्स तक सीमित करें। जब पोषक तत्वों की बात आती है तो फलों का रस अच्छा नहीं होता क्योंकि उनमें फाइबर की कमी होती है जो कि पूरे फलों में होता है। यदि आपके पास जूस होना चाहिए और फल नहीं, तो इसे प्रति दिन एक छोटे गिलास तक सीमित करें। चाय, कॉफी या सादा सादा पानी पिएं। यूएस फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन स्वस्थ वयस्कों के लिए प्रतिदिन सेवन करने के लिए 400 मिलीग्राम (लगभग 4 कप ब्रूड कॉफ़ी) कैफीन की एक सुरक्षित मात्रा मानता है। हालांकि, अमेरिकन कॉलेज ऑफ ओब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को अपने कैफीन का सेवन एक दिन में 200 मिलीग्राम (लगभग 2 कप ब्रूड कॉफी) तक सीमित रखना चाहिए।</p>
<p><strong>सबसे महत्वपूर्ण बात, &#8220;सक्रिय रहें ::</strong><br />
हेल्दी ईटिंग प्लेट के प्लेसमेट पर लाल रंग की आकृति इस बात की याद दिलाती है कि वजन नियंत्रण में सक्रिय रहना भी महत्वपूर्ण है। यदि आप अच्छी तरह से कैलोरी बर्न नहीं कर रहे हैं तो दुनिया में सभी आहार बेकार हैं और कुछ भी नहीं है। अनुसंधान सक्रिय रहने के लाभों का दृढ़ता से समर्थन करता है। हार्वर्ड की रिपोर्ट कहती है कि सभी उम्र के लोगों के लिए कई तरह की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों के खिलाफ लड़ाई में व्यायाम करने से लाभ मिलता है। हालांकि, व्यस्त जीवन शैली और एक ऐसा वातावरण जो दिन के कई घंटों के लिए गतिहीन रहने को प्रोत्साहित करता है, ने कई लोगों के लिए प्राथमिकता के रूप में व्यायाम की रैंकिंग को कम कर दिया है।<br />
जब आप इन युक्तियों का पालन करते हैं और एक सुखी, केंद्रित और तनाव मुक्त जीवन जीते हैं, तो दीर्घायु और अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है।</p>
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		<item>
		<title>तनाव में ज्यादा भोजन</title>
		<link>https://drakashmathur.com/7-3/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[drakashmathur]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jul 2024 07:39:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Media Articles]]></category>
		<category><![CDATA[पाचन : सामान्य जानकारियां]]></category>
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					<description><![CDATA[क्यों तनाव लोगों को अधिक खाने का कारण बनता है ? &#8216;स्ट्रेस ईटिंग&#8217; आपके वजन घटाने के लक्ष्यों को बर्बाद [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>क्यों तनाव लोगों को अधिक खाने का कारण बनता है ?</strong><br />
&#8216;स्ट्रेस ईटिंग&#8217; आपके वजन घटाने के लक्ष्यों को बर्बाद कर सकता है &#8211; बिना ज्यादा खाए तनाव को दूर करने के तरीके खोजना महत्वपूर्ण है<br />
&#8220;तनाव में खाने&#8221; वाक्यांश के पीछे बहुत सच्चाई है। तनाव, इससे निकलने वाले हार्मोन और उच्च वसा, शर्करा युक्त &#8220;आरामदायक खाद्य पदार्थ&#8221; के प्रभाव लोगों को अधिक खाने की ओर धकेलते हैं।</p>
<p>अल्पावधि में, तनाव भूख को बंद कर सकता है। तंत्रिका तंत्र हार्मोन एपिनेफ्रीन (जिसे एड्रेनालाईन भी कहा जाता है) को पंप करने के लिए गुर्दे के ऊपर अधिवृक्क ग्रंथियों को संदेश भेजता है। एपिनेफ्रीन शरीर की लड़ाई-या-उड़ान प्रतिक्रिया को ट्रिगर करने में मदद करता है, एक संशोधित शारीरिक स्थिति जो अस्थायी रूप से खाने को रोक देती है।</p>
<p>लेकिन अगर तनाव बना रहता है, तो कुछ अलग हो जाता है। अधिवृक्क ग्रंथियां कोर्टिसोल नामक एक और हार्मोन छोड़ती हैं, और कोर्टिसोल भूख बढ़ाता है और खाने की प्रेरणा सहित सामान्य रूप से प्रेरणा भी बढ़ा सकता है। एक बार तनावपूर्ण प्रकरण समाप्त हो जाने पर, कोर्टिसोल का स्तर गिरना चाहिए, लेकिन यदि तनाव दूर नहीं होता है &#8211; या यदि किसी व्यक्ति की तनाव प्रतिक्रिया &#8220;चालू&#8221; स्थिति में फंस जाती है &#8211; तो कोर्टिसोल ऊंचा रह सकता है।</p>
<p><strong>तनाव खाना, हार्मोन और भूख</strong><br />
तनाव भोजन की प्राथमिकताओं को भी प्रभावित करता है। कई अध्ययनों  ने दिखाया है कि शारीरिक या भावनात्मक संकट से वसा, चीनी, या दोनों में उच्च भोजन का सेवन बढ़ जाता है। उच्च इंसुलिन के स्तर के साथ संयोजन में उच्च कोर्टिसोल का स्तर जिम्मेदार हो सकता है। अन्य शोध बताते हैं कि घ्रेलिन, एक &#8220;भूख हार्मोन&#8221; की भूमिका हो सकती है।</p>
<p>एक बार अंतर्ग्रहण करने के बाद, वसा और चीनी से भरे खाद्य पदार्थों का प्रतिक्रिया प्रभाव पड़ता है जो तनाव संबंधी प्रतिक्रियाओं और भावनाओं को कम करता है। ये खाद्य पदार्थ वास्तव में &#8220;आराम&#8221; खाद्य पदार्थ हैं जिसमें वे तनाव का सामना करने लगते हैं &#8211; और यह उन खाद्य पदार्थों के लिए लोगों की तनाव-प्रेरित लालसा में योगदान दे सकता है।</p>
<p>बेशक, अधिक भोजन केवल तनाव से संबंधित व्यवहार नहीं है जो पाउंड जोड़ सकता है। तनावग्रस्त लोग सामान्यतया नींद खो देते हैं, कम व्यायाम करते हैं और अधिक शराब पीते हैं, ये सभी अतिरिक्त वजन में योगदान कर सकते हैं।</p>
<p><strong>लोग तनाव में ज्यादा क्यों खाते हैं?</strong><br />
कुछ शोध तनाव से निपटने के व्यवहार में लिंग अंतर का सुझाव देते हैं, जिसमें महिलाओं के भोजन की ओर तथा पुरुषों के शराब या धूम्रपान की ओर रुख करने की संभावना अधिक होती है। और एक फिनिश अध्ययन जिसमें 5,000 से अधिक पुरुषों और महिलाओं को शामिल किया गया था, ने दिखाया कि मोटापा महिलाओं में तनाव से संबंधित खाने से जुड़ा था, लेकिन पुरुषों में नहीं।</p>
<p>हार्वर्ड के शोधकर्ताओं ने बताया है कि काम और अन्य प्रकार की समस्याओं से तनाव वजन बढ़ने से संबंधित है, लेकिन केवल उन लोगों में जो अध्ययन अवधि की शुरुआत में अधिक वजन वाले थे। एक सिद्धांत यह है कि अधिक वजन वाले लोगों में इंसुलिन का स्तर ऊंचा होता है, और उच्च इंसुलिन की उपस्थिति में तनाव से संबंधित वजन बढ़ने की संभावना अधिक होती है।</p>
<p>तनाव की प्रतिक्रिया में लोग कितना कोर्टिसोल का उत्पादन करते हैं, यह तनाव-वजन बढ़ने के समीकरण में भी कारक हो सकता है। 2007 में, ब्रिटिश शोधकर्ताओं ने एक सरल अध्ययन तैयार किया, जिसमें दिखाया गया कि जिन लोगों ने प्रयोगात्मक सेटिंग में उच्च कोर्टिसोल स्तरों के साथ तनाव का जवाब दिया, उनके नियमित जीवन में कम-कोर्टिसोल उत्तरदाताओं की तुलना में दैनिक परेशानियों के जवाब में नाश्ता करने की अधिक संभावना थी।</p>
<p><strong>बिना ज्यादा खाए तनाव कैसे दूर करें ?</strong><br />
जब तनाव किसी की भूख और कमर को प्रभावित करता है, तो व्यक्ति उच्च वसा, शर्करा वाले खाद्य पदार्थों के रेफ्रिजरेटर , अलमारी या घर मे अन्यत्र नहीं रखकर और अधिक वजन बढ़ने से रोक सकता है। उन &#8220;आरामदायक खाद्य पदार्थों&#8221; को संभाल कर रखना केवल परेशानी को आमंत्रित कर रहा है।</p>
<p><strong>तनाव का मुकाबला करने के लिए यहां कुछ अन्य सुझाव दिए गए हैं:</strong><br />
ध्यान (Meditation) अनगिनत अध्ययनों से पता चलता है कि ध्यान तनाव को कम करता है, हालांकि अधिकांश शोधों ने उच्च रक्तचाप और हृदय रोग पर ध्यान केंद्रित किया है। ध्यान लोगों को भोजन के विकल्पों के बारे में अधिक जागरूक बनने में भी मदद कर सकता है। अभ्यास के साथ, एक व्यक्ति वसा और चीनी से भरे आरामदेह भोजन को हथियाने और आवेग को रोकने के लिए आवेग पर बेहतर ध्यान देने में सक्षम हो सकता है।</p>
<p><strong>व्यायाम :</strong> जबकि कोर्टिसोल का स्तर व्यायाम की तीव्रता और अवधि के आधार पर भिन्न होता है, समग्र व्यायाम तनाव के कुछ नकारात्मक प्रभावों को दूर कर सकता है। योग और ताई ची जैसी कुछ गतिविधियों में व्यायाम और ध्यान दोनों के तत्व होते हैं।</p>
<p><strong>सामाजिक समर्थन:</strong> ऐसा लगता है कि दोस्तों, परिवार और सामाजिक समर्थन के अन्य स्रोतों का लोगों द्वारा अनुभव किए जाने वाले तनाव पर बफरिंग प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, शोध से पता चलता है कि अस्पताल के आपातकालीन विभागों जैसे तनावपूर्ण स्थितियों में काम करने वाले लोगों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है ।यदि उनके पास पर्याप्त सामाजिक समर्थन हो। लेकिन यहां तक ​​कि जो लोग ऐसी परिस्थितियों में रहते हैं और काम करते हैं जहां दांव उतना ऊंचा नहीं है, उन्हें समय-समय पर मित्रों और परिवार से मदद की आवश्यकता होती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ज्यादा भोजन</title>
		<link>https://drakashmathur.com/6-3/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[drakashmathur]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jul 2024 07:38:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Media Articles]]></category>
		<category><![CDATA[पाचन : सामान्य जानकारियां]]></category>
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					<description><![CDATA[जरूरत से ज्यादा खाना खाने के हो सकते हैं कई नुकसान कई बार पेट भरा होने के बावजूद खाने की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जरूरत से ज्यादा खाना खाने के हो सकते हैं कई नुकसान</strong><br />
कई बार पेट भरा होने के बावजूद खाने की कोई चीज देखकर आपके मुंह में पानी आ जाता है और खुद पर कंट्रोल नहीं कर पाते हैं। बिना भूख के खाना और बेवजह खाना &#8230;</p>
<p>डेस्क एनबीटी, लखनऊ : कई बार पेट भरा होने के बावजूद खाने की कोई चीज देखकर आपके मुंह में पानी आ जाता है और खुद पर कंट्रोल नहीं कर पाते हैं। बिना भूख के खाना और बेवजह खाना आपकी सेहत के लिए ठीक नहीं है। अगर ऐसा कभी-कभी होता है, तो कोई बात नहीं। अगर अक्सर ही खाने के बाद आप कोई न कोई चीज खाते रहते हैं या आपको बार-बार भूख लगती है, तो ये एक तरह का ईटिंग डिसऑर्डर है। मेडिकल भाषा में बार-बार भूख लगने को फूड एडिक्शन कहते हैं। हालांकि ज्यादातर लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते, लेकिन इस पर अगर कंट्रोल न किया जाए, तो यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह भी साबित हो सकता है।</p>
<p><strong>बिना भूख के खाना</strong><br />
खाने की आदत होने पर व्यक्ति लगातार खाता ही रहता है। वह खाने पर पूरी तरह कंट्रोल खो बैठता है। उसे भरा हुआ पेट अच्छा लगने लगता है। पहले का खाना थोड़ा सा डाइजेस्ट होते ही वह दोबारा खा लेता है। कई बार तो वह खाना डाइजेस्ट होने का इंतजार भी नही करता और दोबारा खा लेता है।</p>
<p><strong>एनर्जी लेवल</strong><br />
फूड एडिक्शन की एक खास वजह न्यूरोबायलॉजिकल इम्बैलेंस है। एक बार इसका लेवल बॉडी में गिरता है तो व्यक्ति को कमजोरी महसूस होती है। वह फिर से खाना शुरू कर देता और फिर उसे बॉडी में एनर्जी बनाए रखने के लिए हमेशा खाना पड़ता है। हालांकि, बार-बार खाने वाला व्यक्ति अपनी इस आदत से गिल्ट महसूस करता रहता है, लेकिन सिचुएशन ऐसी बन जाती है कि वह चाहकर भी कुछ नहीं कर सकता।</p>
<p><strong>वजन बढ़ना व मोटापा</strong><br />
फूड एडिक्शन से वजन बढ़ना व मोटापा होता है। वजन बढ़ने से कई और बीमारियां आपको जकड़ लेती हैं। जैसे शरीर की काम करने की क्षमता कम हो जाती है और आप जल्दी थकने लगते हैं।</p>
<p><strong>ब्लड में कोलेस्ट्रॉल बढ़ना</strong><br />
व्यक्ति न चाहते हुए भी कई ऐसी चीजें खा लेता है जिनके ज्यादा खाने से कोलेस्ट्रॉल का खतरा बढ़ जाता है और इससे दिल का दौरा जैसी समस्याएं हो सकती हैं।</p>
<p><strong>ऐसे करें बचाव<br />
</strong><br />
<strong>अपना ध्यान हटाएं</strong><br />
इससे बचने का एक ही तरीका है और वह है इस साइकल को तोड़ना। जब भूख लगे, तो उस पर ध्यान न दें, अपना ध्यान उस दौरान किसी और काम की ओर लगाएं। अगर फिर भी कंट्रोल नहीं हो पा रहा तो साइकॉलजिकल ट्रीटमेंट लें। ऐसे फूड लेने की कोशिश करें, जो आपका मूड अच्छा कर दें। इससे बॉडी में सेरिटोनिन लेवल बढ़ेगा। ये फूड डिप्रेशन से बाहर आने में भी आपकी मदद करेगा।<br />
हेल्दी डाइट लें</p>
<p>अपनी डाइट में स्वस्थ व संतुलित आहार शामिल करें। फ्रेश फ्रूट्स, नट्स, सीड्स और विभिन्न तरह की सब्जियां खाएं। अनाज और दालों से आपको लो ग्लाइकेमिक इंडेक्स वाला भोजन मिल जाता है। यह भोजन शरीर में धीरे-धीरे शर्करा रिलीज करता है। इससे शरीर में लगातार ऊर्जा बनी रहती है, मस्तिष्क शांत रहता है और ज्यादा समय तक पेट भरे रहने का एहसास होता है। हमारा रोज का भोजन, जिसमें अनाज, दालें, सब्जियां और दूध होता है, इसी उत्तम भोजन की श्रेणी में आता है।</p>
<p><strong>तनाव से बचें</strong><br />
इसके अलावा लंबे समय से चले आ रहे मानसिक तनाव के कारण भी कई लोगों को बार-बार भूख लगती है। ऐसा तब होता है जब तनाव गेर्लिन के स्तर को बढ़ाता है और इसका स्तर बढ़ने से अवसाद एवं बेचैनी से संबंधित व्यवहार घट जाता है। ( साभार &#8211; नवभारत टाइम्स )</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>तनाव और पाचन</title>
		<link>https://drakashmathur.com/5-3/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[drakashmathur]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jul 2024 07:38:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Media Articles]]></category>
		<category><![CDATA[पाचन : सामान्य जानकारियां]]></category>
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					<description><![CDATA[अगर आप अधिक तनाव लेते हैं तो इसके कारण खाना पचने में समस्‍या हो सकती है और ब्लोटिंग, कब्ज, डायरिया, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अगर आप अधिक तनाव लेते हैं तो इसके कारण खाना पचने में समस्&#x200d;या हो सकती है और ब्लोटिंग, कब्ज, डायरिया, सीने में जलन, रिफ्लैक्स, गैस, आदि पाचन संबंधी समस्&#x200d;यायें इसके कारण हो सकती हैं।</p>
<p><strong>पेट और दिमाग का संबंध</strong><br />
पेट और दिमाग का सीधा संबंध है। इंस्टेस्टाइन म्यूकोसा और दिमाग का तंत्रिका तंत्र एक दूसरे से न्यूरॉन सेल्स के माध्यम से जुड़ा होता है। तनाव के बाद मस्तिष्क में हार्मोन (डोपामाइन सहित दूसरे हार्मोन) का स्राव अधिक होता है। इसका इलाज काउंसिलिंग है। इरिटेबल बाउल सिंड्रोम इसी वजह से होता है। ऐसे मरीजों को दवाओं से आराम नहीं मिलता है। इससे आंतें सही तरीके से खाने को पचा नहीं पाती हैं।</p>
<p><strong>धीमी होती पाचन क्रिया</strong><br />
तनाव के कारण पाचन क्र्रिया के दौरान पेट में पेप्टाइड (यह प्राकृतिक रूप से पेट में स्रावित होने वाला पदार्थ है) होता है, जो अमाशय में गैस और सूजन के लिए जिम्मेदार होता है। यह पाचन क्रिया को बाधित करता है।</p>
<p>एक्सपर्ट : डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, भोपाल (साभार &#8211; राजस्थान पत्रिका)</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>लिवर को मजबूत करने के उपाय</title>
		<link>https://drakashmathur.com/4-3/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[drakashmathur]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jul 2024 07:35:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Media Articles]]></category>
		<category><![CDATA[लिवर]]></category>
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					<description><![CDATA[लिवर को मजबूत करने के उपाय : लीवर शरीर का सबसे भारी अंग है और इसे स्वस्थ रखना बहुत जरूरी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लिवर को मजबूत करने के उपाय : लीवर शरीर का सबसे भारी अंग है और इसे स्वस्थ रखना बहुत जरूरी है</strong></p>
<p><strong>लिवर को स्वस्थ रखने के उपाय</strong><br />
शरीर के बेहतर कामकाज के लिए लीवर को स्वस्थ रखना बहुत जरूरी खाना पचाना, शरीर से टॉक्सिक पदार्थ बाहर निकालना</p>
<p><strong>लिवर का काम</strong><br />
शरीर के बेहतर कामकाज के लिए लीवर को स्वस्थ रखना बहुत जरूरी है. यह सबसे भारी अंग शरीर के लिए कई काम करता है, जिनमें खाना पचाना, शरीर से टॉक्सिक पदार्थ बाहर निकालना, शरीर को एनर्जी देना, बीमारियों से लड़ने की क्षमता प्रदान करना, चयापचय को मजबूत करना, पित्त का निर्माण और इसका स्राव करना, बहते रक्त को रोकने वाले तत्वों का निर्माण करना आदि शामिल हैं।</p>
<p><strong>शराब पीने या बाहर के खाने की वजह से खराब होता है लीवर</strong><br />
लीवर को मजबूत करने के उपाय : लीवर को स्वस्थ और साफ रखने के लिए खाएं ये 6 चीजें ज्यादातर लीवर की खराबी अधिक तेल मसाले वाला भोजन, ज्यादा शराब पीने या बाहर के खाने की वजह से होता है। लीवर की खराबी में लीवर का फै टी होना, सूजन आ जाना और लीवर में इन्फे क्शन हो जाना शामिल है। इसके अलावा अधिक देर तक बैठने की आदत से लीवर में फैट जमा होने लगता है जिससे लीवर का आकार असामान्य हो जाता है जिसे फै टी लीवर कहते है।</p>
<p><strong>लिवर को साफ और मजबूत करने वाले खाद्य पदार्थ</strong><br />
<strong>चुकंदर</strong><br />
चुकंदर का सेवन लिवर के लिए फायदेमंद माना जाता है। चुकंदर में अधिक मात्रा में एं टीऑक्सीडेंट होते हैं। जो हमारे शरीर से वसा को कम करने में मदद करता है। चुकं दर को हम सलाद या सब्जी के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।<br />
<strong>पालक</strong><br />
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए पालक का सेवन करना चाहिए। पालक को लिवर के साथ-साथ हमारी आंखों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। पालक में विटामिन-ए और ग्लूटाथिओन नामक एं टीऑक्सीडेंट होते हैं। जो लीवर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है।<br />
<strong>हल्दी</strong><br />
हल्दी में भड़काऊ और ऑक्सीडेटिव गुण होते हैं। जो तनाव को कम करता है और लिवर को किसी भी तरह की बीमारियों से बचाता है। हल्दी को सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है।<br />
<strong>गाजर</strong><br />
गाजर में एं टी-ऑक्सीडेंट गुण होते हैं। जो लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसमें विटामिन, खनिज गुण भी होते हैं। आप गाजर का उपयोग सलाद या जूस के रूप में कर सकते हैं।<br />
लिवर को मजबूत करने के उपाय : लिवर को स्वस्थ और साफ रखने के लिए खाएं ये 6 चीजें<br />
<strong>ग्रीन टी</strong><br />
ग्रीन टी पीना सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। ग्रीन टी वजन कम करने के साथ ही लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करती है। ग्रीन टी में मौजूद एं टी-ऑक्सीडेंट की उच्च मात्रा के कारण, यह शरीर से बुरी चीजों को हटाने में मदद कर सकता है।<br />
<strong>एवोकै डो</strong><br />
एवोकैडो में एं टी-इंफ्लेमेटरी और एं टी-ऑक्सीडेंट गुण होते हैं। जो लीवर को नुकसान से बचाने का काम कर सकता है।<br />
एवोकाडो को सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है।</p>
<p><strong>लिवर को मजबूत करने के उपाय : लीवर को स्वस्थ और साफ रखने के लिए खाएं ये 6 चीजें</strong><br />
<strong>इन चीजों को भी करें सेवन</strong><br />
नियमित फाइबर और एं टीऑक्सीडेंट्स से भरपूर सेब, फलों की स्मूदी या जूस, गाजर, टमाटर, तरबूज, पपीता, अंगूर, मूंगफली, अमरूद, धनिया, चुकं दर, लहसुन, अखरोट और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन अधिक करे ।</p>
<p>इसके अलावा पत्तागोभी, फू लगोभी और ब्रोकोली जैसी सब्जियों को आहार में नियमित सामिल करे । क्योंकि इनमें सल्फर अधिक होता है जो टोक्सिन को तेजी से बाहर निकालकर लीवर को साफ रखता है।</p>
<p><strong>नियमित रूप से एक्सरसाइज करना भी जरूरी</strong><br />
लिवर की सेहत के लिए जहां उसकी सफाई जरूरी है वही इसकी कार्यप्रणाली को दुरुस्त बनाने के लिए थोड़ा व्यायाम या कसरत भी जरूरी है। रोजाना नियमित 30 मिनट की कसरत से लीवर की आयु बढ़ाई जा सकती है। भोजन के बाद 10 –15 मिनट टहलें।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कब्ज़</title>
		<link>https://drakashmathur.com/3-3/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[drakashmathur]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jul 2024 07:33:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Media Articles]]></category>
		<category><![CDATA[पाचन संबंधी रोग/विकार]]></category>
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					<description><![CDATA[कब्ज की प्रॉब्लमः खाने में शामिल करें ये 11 चीजें, परेशानी से पाएं निजात विशेषज्ञों (experts) के अनुसार कोई भी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कब्ज की प्रॉब्लमः खाने में शामिल करें ये 11 चीजें, परेशानी से पाएं निजात</strong><br />
विशेषज्ञों (experts) के अनुसार कोई भी व्यक्ति सप्ताह में तीन या उसके कम बार मल त्याग करता है तो उसे कब्ज की समस्या हो सकती है. उनका मानना है कि इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए व्यक्ति को हाई फाइबर (high fiber food) युक्त भोजन को अपने खाने में शामिल करना चाहिए.</p>
<p>सर्दी का मौसम आते ही आलसी आने लगती और प्यास भी कम लगती है. कई बार मसालेदार और मजबूत (heavy food) खाना आपके पेट में समस्याएं बढ़ा सकता है. जिससे आपको कब्ज की समस्या (constipation problem) भी हो सकती है. और फिर काम में समस्या और दिन खराब होने की भी चिंता.</p>
<p>विशेषज्ञों (experts) के अनुसार कोई भी व्यक्ति सप्ताह में तीन या उसके कम बार मल त्याग करता है तो उसे कब्ज की समस्या हो सकती है. उनका मानना है कि इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए व्यक्ति को हाई फाइबर (high fiber food) युक्त भोजन को अपने खाने में शामिल करना चाहिए.</p>
<p><strong>जानिए 11 हाई फाइबर युक्त आहार कौन से हैं-</strong><br />
<strong>1. पपीता (papaya) </strong></p>
<p>&#8211; पपीता एक ऐसा फल है जो आंतों को साफ रखता है. इसमें विटामिन ओ, पोटैशियम और कैल्शियम काफी मात्रा में होता है.<br />
&#8211; हर सुबह सबसे पहले पपीता का आहार करने से कब्ज की समस्या नहीं होती और ब्लड सुगर भी मैंटेन रहता है.</p>
<p><strong>2. संतरा (orange)</strong><br />
&#8211; संतरा का जूस कब्ज में राहतकारी रहता है. इसमें विटामिन सी, मिनरल्स और डाइटरी फाइबर होता है.<br />
&#8211; सुबह 1 संतरे को खाने से या इतने का ही जूस पीने से कब्ज की परेशानी नहीं होती है.</p>
<p><strong>3. दालें और साबुत अनाज (Pulses and whole grains)</strong><br />
&#8211; दाल और साबुत अनाज में विटामिन और मिनरल्स होते हैं. इसमें युक्त फाइबर डाइजेशन में सहायक होता है.<br />
&#8211; मूंग और अरहर की दाल का सेवन करने से कब्ज की समस्या से बचा जा सकता है. दोनों में ही फाइबर की मात्रा अधिक होती है.</p>
<p><strong>4. ब्राउन राइस (Brown Rice)</strong><br />
&#8211; पुराने चावल और ब्राउन राइस में फाइबर अधिक मात्रा में होता है, जिससे पाचन भी सही रहता है.<br />
&#8211; बिना पॉलिश्ड (not polished) होल ग्रेन राइस (whole grain rice) खाने से कब्ज की समस्या से निजात पाया जा सकता है.</p>
<p><strong>5. हरी पत्तेदार सब्जियां (Green Vegetables)</strong><br />
&#8211; हरी सब्जियों में सोल्युबल फाइबर डाइजेस्टिव ट्रैक्ट (घुलनशील पदार्थ) होता है जो नहीं पचने वाले खाने को भी लसदार और जिलेटीन जैसा बनाता है. जिससे हेवी खाना (heavy food) भी आसानी से पच जाता है.<br />
&#8211; पालक, मेथी, बथुआ, बंदगोभी जैसी सब्जियों को अधिक मात्रा में खाएं, इसमें मौजूद फाइबर आपको कब्ज से संबंधित हर समस्या से बचाएगा.</p>
<p><strong>6. सलाद (salads)</strong><br />
&#8211; फलों और सब्जियों का सलाद फाइबर युक्त होता है. इसमें युक्त विटामिन हमारे शरीर की सभी जरूरतों को पूरा करता है.<br />
&#8211; सुबह खाने के अलावा इसे खाने के साथ भी खा सकते हैं.</p>
<p><strong>7. दलिया (Oats)</strong><br />
&#8211; ओट्स में बीटा ग्लूटेन फाइबर शामिल है. इसमें मौजूद अनसॉल्युबल फाइबर से पाचन शक्ति बढ़ती है.<br />
&#8211; ओट्स कैल्शियम, पोटेशियम, विटामिन बी-कॉम्पेल्स और मैग्नीशियम से भरपूर होता है, जो ब्लड शुगर को भी मैंटेन रखता है.</p>
<p><strong>8. मक्का (corn)</strong><br />
मक्का में फाइबर के साथ ही विटामिन-बी और फोलिक एसिड होता है. इसका सेवन मलाशय में जमी गंदगी को दूर करता है.<br />
&#8211; उबली मक्का खाने से खून की कमी नहीं होती है. गर्भवती महिलाओ के लिए भी फायदेमंद होता है.</p>
<p><strong>9. अंकुरित चीजें (sprouts)</strong><br />
&#8211; अंकुरित आहार शरीर को समय समय पर डिटॉक्स करके पाचन तंत्र (digestion system) को मजूबत बनाता है.<br />
&#8211; चना और मूंग को अंकुरित कर खाने से कब्ज और गैस की बीमारी में राहत रहती है.</p>
<p><strong>10. जड़ वाली सब्जियां (Root Vegetables)</strong><br />
&#8211; जमीन के अंदर उगने वाली सब्जियों में विटामिन और मिनरल्स गट बैक्टीरिया को ठीक करने की शक्ति होती है. ये इम्यूनिटी सिस्टम को भी मजबूत बनाए रखते हैं.<br />
&#8211; शलजम, गाजर, चकुंदर व मूली जैसी सब्जियों खाने से पेट साफ रहता हैं.</p>
<p><strong>11. रागी (Ragi)</strong><br />
रागी में डाइट्री फाइबर होता है जो पाचन ठीक करने के साथ पेट को स्वस्थ रखता है.<br />
&#8211; हमेशा ही जिन्हें कब्ज की समस्या रहती है, उन्हें गेहूं की रोटी की जगह रागी की रोटी का सेवन करना चाहिए.<br />
फाइबर के फायदे (fibre benefits in hindi)<br />
कई विशेषज्ञों का मानना है कि हाई फाइबर खाने के कई फायदे हैं.</p>
<p><strong>1. अच्छे बैक्टिरीया को देता है जन्म</strong><br />
फाइबर (Fiber) इन पदार्थों के रेशों वे छिलकों में होता है, जो लाभकारी तत्व हैं. दरअसल, यह एक न हजम होने वाला खाने का हिस्सा होता है, लेकिन यह शरीर के लिए बेहद उपयोगी होता है. इसे रफेज के नाम से भी जानते हैं. रफेज पेट में अच्छे बैक्टीरिया (Good Bacteria) को जन्म देता है.</p>
<p><strong>2. पेट फूलना</strong><br />
कब्ज और पेट फूलने की प्रॉब्लम जिन्हें भी होती है उनके लिए हाई फाइबर खाना उपयोगी होता है. ये डाइजेशन प्रक्रिया को ठीक कर मल त्याग में सहायक होता है. फाइबर शरीर में खाने को पचाने की प्रक्रिया को हेल्दी तरीके से चलाता है.</p>
<p><strong>3. ब्लड शुगर कंट्रोल</strong><br />
&#8211; फाइबर ह्रदय रोग में सुधार करने के साथ ही आपको अपने वजन और ब्लड शुगर को ठीक रखने में भी मदद कर सकता है. बॉडी में मौजूद दूषित पदार्थों को दूर कर कोलेस्टॉल को कम करता है.</p>
<p>&#8211; डाइबिटीज के मरीजों को भी कब्ज की समस्या है तो वे भी इस खाने का उपयोग कर मल त्याग की फ्रीक्वेंसी को सही कर ब्लड शुगर कंट्रोल में रख सकते हैं.</p>
<p>अगर आप भी ठंड के दिनों में मल त्याग की समस्या से जूझ रहे हैं और पेट को साफ रखना चाहते हैं. तो इन 11 हाई फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को अपने खाने में शामिल करें, इससे आपको पेट से जुड़ी किसी भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा. साथ ही सेहत का ध्यान रखना है तो गर्म, मसालेदार चीजों के सेवन पर कंट्रोल कर खूब पानी पिएं.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अपने लिवर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करें</title>
		<link>https://drakashmathur.com/2-3/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[drakashmathur]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jul 2024 07:30:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Media Articles]]></category>
		<category><![CDATA[लिवर]]></category>
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					<description><![CDATA[किरण आर. सईद बुमेरांग (boomerang) के आकार का, हमारा लीवर शरीर के लिए पोषक तत्वों का &#8216;शिकार&#8217; करता है, एक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>किरण आर. सईद</strong><br />
बुमेरांग (boomerang) के आकार का, हमारा लीवर शरीर के लिए पोषक तत्वों का &#8216;शिकार&#8217; करता है, एक द्वारपाल के रूप में कार्य करता है, जो कुछ भी आप खाते हैं उसे संसाधित (process) करने के लिए कड़ी मेहनत करता है, जो कुछ भी जाता है उसे शुद्ध करने के लिए एक फिल्टर की तरह काम करता है और एक पाचन अंग की तरह बाहर भेजने की प्रक्रिया में सहायता करता है।</p>
<p>पाचन के बाद, लगभग 85-90 प्रतिशत परिसंचारी रक्त (circulating blood) सीधे लिवर में जाता है जो पित्त का उत्पादन करता है। पित्त एक डिटॉक्सिफायर के रूप में काम करता है और भोजन से प्रोटीन, कार्ब्स और वसा का चयापचय (metabolises) करता है।</p>
<p>लिवर आवश्यक विटामिन और खनिजों का भंडारण करता है, हार्मोनल संतुलन बनाए रखता है, संग्रहीत चीनी को प्रयोग करने योग्य चीनी में परिवर्तित करता है, पुराने आरबीसी को नष्ट करके संक्रमण के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली (immune sysyem) की मदद करता है, हमारे रक्त से बैक्टीरिया और कार्सिनोजेन्स (carcinogenes) को हटाता है। इन सब के मद्देनजर पाचन सम्बन्धी क्रियाओं को चालू रखने के लिए अपने लिवर की देखभाल करना और उससे प्यार करना आवश्यक है। लिवर को साफ करें, इससे पहले कि यह मदद के लिए चिल्लाए।</p>
<p><strong>चेतावनी के संकेतों पर ध्यान दें :</strong><br />
एक बहुक्रियाशील अंग होने के कारण, लिवर रोगों के प्रति बहुत संवेदनशील होता है। एक बोझिल लिवर के संभावित संकेतक ( indicators) पेट की सूजन, लिवर पर असहजता (discomfort), अत्यधिक पेट की चर्बी, अपच, नाराज़गी, मुँहासे, या खुजली और धब्बेदार त्वचा, भूख न लगना, बिना कारण वजन बढ़ना और कैलोरी कम करने पर भी वजन कम करने में असमर्थता है।  हालांकि, लक्षणों को इंगित करना आसान नहीं है, लेकिन  उक्त संकेतक अंततः, फैटी लीवर में बदल सकते हैं।<br />
देखने के लिए अन्य संकेतों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, थकान, उच्च कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का स्तर, मनोदशा, निराशा की भावनाएं, अवसाद, स्लीप एपनिया (sleep apnea), खर्राटे और कभी-कभी क्रोध का प्रकोप शामिल हैं।<br />
प्राकृतिक और ताजा खाद्य पदार्थों का सेवन करें:<br />
एक स्वस्थ लिवर के लिए, सुपर नेचुरल खाद्य पदार्थों को संतुलित आहार के साथ जोड़ा जाना चाहिए, जो लिवर की जीवन शक्ति को बढ़ाते हैं, क्षति को ठीक करते हैं और लिवर को आराम देते हैं।</p>
<p><strong>नाश्ता:</strong><br />
नाश्ते से लेकर रात के खाने तक फाइबर से भरपूर आहार की योजना बनाएं, साबुत गेहूं की ब्रेड, जई (oats), राई (rye) और जौ (barley) के अनाज तृप्ति की भावना को बढ़ाते हैं। ये डिटॉक्स क्रिया पर भार को कम करके पाचन तंत्र के लिए सफाई करने वाले (scrubber) के रूप में कार्य करते हैं।<br />
दिन की शुरुआत एक गिलास नींबू पानी या ताजे फलों के रस से करें । सभी खट्टे फल, बेरी परिवार व कीवी फल, ख़ुरमा (persimmons) या अंगूर प्राकृतिक एंटीबायोटिक और कैंसर विरोधी होते हैं और ये टॉक्सिन्स (toxins) पदार्थों के संश्लेषण (synthesis) को उन पदार्थों में आसान बनाते हैं, जिन्हें पानी से अवशोषित किया जा सकता है और बाहर निकाल दिया जा सकता है।</p>
<p><strong>दोपहर का भोजन और रात का खाना :</strong><br />
ब्रोकोली, गोभी, फूलगोभी या लेट्यूस ग्लूकोसाइनोलेट (glucosinolate) से भरपूर होते हैं और हानिकारक टॉक्सिन्स पदार्थों से छुटकारा पाने में सहायता करते हैं। अगर इन्हें लंच या डिनर में ताजा, कच्चा या स्टीम्ड के रूप में परोसा जाए तो उनका स्वाद बेहतर होता है । इन्हें सफेद मांस, होल ग्रेन ब्रेड सैंडविच, बेक्ड या स्टीम्ड चिकन अथवा सैल्मन (salmon) या क्लियर सूप के साथ लिया जा। सकता है।<br />
पके हुए बीन्स, दाल, छोले या राजमा फाइबर से भरपूर होते हैं, और इनमें टोक्सिन पदार्थों को बाहर निकालने के लिए पर्याप्त प्रोटीन होते हैं। लहसुन, मूली, प्याज़ और अंडे का उपयोग करके सल्फर का सेवन बढ़ाएं क्योंकि यह वसा को तोड़ने और उन्हें शरीर से बाहर निकालने में सहायता करता है।</p>
<p><strong>सलाद :</strong><br />
गाजर, टमाटर और बीट्स (beets), बैंगनी गोभी, लाल, पीली और हरी शिमला मिर्च, या पत्तेदार साग जैसे अल्फाल्फा, सीताफल, केल और पालक (alfalfa, cilantro,kale and spinach) में लाल रंग के रूप में पाए जाने वाले पिगमेंट और फाइटो-रसायनों के साथ सलाद इकट्ठा करें ताकि लिवर को क्लोरोफिल (chlorophyll) को बढ़ावा मिल सके। सलाद को बेलसमिक विनेगर (balsamic vinegar) या एप्पल साइडर (apple cider) में मिलाएं जो टॉनिक और क्लींजर (cleanser) दोनों का काम करता है।</p>
<p><strong>नाश्ता :</strong><br />
गाजर की स्टिकस, ताजा सेब के स्लाइस, अच्छी गुणवत्ता वाली डार्क चॉकलेट, नमक रहित अखरोट और बादाम जिसमें आर्जिनिन (arginine) होता है, जैसे लिवर के अनुकूल स्नैक्स का उपयोग , अमोनिया को बाहर निकालकर और रक्त को शुद्ध करके सफाई क्रिया को सपोर्ट करने का एक आसान तरीका है।</p>
<p><strong>डेसर्ट :</strong><br />
लिवर के अनुकूल फल जिनमें सभी प्रकार के चेरी और जामुन (cherries and berries) शामिल हैं, को डेसर्ट, शुगर-फ्री जेलो में शामिल किया जा सकता है या कम वसा वाले योगहर्ट्स (yoghurts) और स्किम्ड दूध (skimmed milk) के साथ खाया जा सकता है।</p>
<p><strong>तेल और वसा :</strong><br />
भोजन की तैयारी में ठंडे कंप्रेस्ड तेलों जैसे जैतून का तेल, अलसी, नारियल और सूरजमुखी के तेल का प्रयोग करें। इनमें पाए जाने वाले ओमेगा-3-फैटी एसिड हानिकारक टॉक्सिन्स पदार्थों को सोखने के लिए शरीर को एक तरल आधार प्रदान करते हैं, जिन्हें बाद में लिवर द्वारा फ़िल्टर किया जाता है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए आहार में एवोकाडो (avocados) और जैतून (olives)जोड़ें ।<br />
मसाले और जड़ी-बूटियाँ:<br />
भोजन में हल्के मसाले और जड़ी-बूटियों जैसे जलेपीनो मिर्च (jalapeno peppers), पीपरकॉर्न (peppercorns), स्टार ऐनीज़ (star anise), थाइम(thyme), हल्दी, पेपरिका (paprika), जायफल (netmeg), ऑरेगैनो (oregano), अजवायन, लौंग, सूखी मेथी व मेथी दाना, इलायची, सौंफ, खसखस, धनिया, सरसों, तिल के साथ मिलाएं। साथ ही जीरा, दालचीनी, केसर, रोजमैरी (rosemary) और सूखे पुदीने के पत्ते उपयोग में लें क्योंकि ये लिवर की कोशिकाओं के अंदर टोक्सिन पदार्थों के कुचलने (crashing) की गति को तेज करते हैं।</p>
<p><strong>खूब पानी पिएं :</strong><br />
पानी टॉक्सिन्स पदार्थों के शरीर को साफ करता है ।चूंकि यह आपको भरा हुआ महसूस कराता है, इसलिए कम आहार लेना आसान होता है। लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए भोजन के बीच में ग्रीन टी पिएं, क्योंकि यह एंटीऑक्सीडेंट कैटेचिन से भरपूर होती है।</p>
<p><strong>इनसे बचें और इन्हें ना कहें :</strong><br />
शराब, धूम्रपान, मध्यरात्रि भोजन, प्रोसेस्ड बेकरी उत्पाद, फाइन आटा ब्रेड और बिस्कुट, उच्च सोडियम खाद्य पदार्थ, पुराना चीज, इंस्टेंट कॉफी, रेड मीट, जमे हुए और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ और कार्बोनेटेड पेय से बचें। हालांकि इनका स्वाद बहुत अच्छा होता है, लेकिन ध्यान रखें कि आइसक्रीम और सॉफ्ट चीज में कैल्शियम की मात्रा कम और संतृप्त वसा (saturated fats) की मात्रा अधिक होती है। कच्चा या स्मोक्ड सीफूड और डीप-फ्राइड फास्ट फूड खाने से बचें।<br />
डॉक्टर की सलाह के बिना पेरासिटामोल, एसिटामिनोफेन और इबुप्रोफेन बेस वाली दर्द निवारक दवाएं न लें। आवश्यकता से अधिक आयरन सप्लीमेंट का प्रयोग न करें।<br />
अद्भुत परिणाम देखने के लिए आहार व्यवस्था के प्रति वफादार रहें। जब आप व्यायाम के साथ उचित मात्रा में वजन कम करते हैं, तो आपको समग्र स्वास्थ्य पर प्रभाव पर ध्यान देना चाहिए। इस आहार के दौरान हमेशा डॉक्टर से परामर्श लें, और सक्रिय जीवन शैली और स्वस्थ वातावरण के साथ बने रहें।</p>
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